दाखिल-खारिज में गंभीर अनियमितता, लापरवाही और मनमानेपन पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। भोजपुर जिले के शाहपुर अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी एवं वर्तमान में सिवान में पदस्थापित सोनू कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सहयोग पोर्टल पर प्राप्त शिकायत की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने साफ कर दिया है कि राजस्व कार्यों में लापरवाही और मनमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोनू गुप्ता का निलंबन इसी नीति का हिस्सा है।
विभागीय आदेश के अनुसार, समाहर्ता, भोजपुर द्वारा सहयोग पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के संबंध में भेजे गए प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायत सहयोग पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हुई थी। जांच में दो दाखिल-खारिज वाद के निष्पादन में गंभीर अनियमितता, लापरवाही और मनमानेपन के आरोप सामने आए। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसे सरकारी कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
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विभाग को दिया गया निर्देश
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, छपरा निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। विभाग ने मामले में सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। समाहर्त्ता, भोजपुर को सोनू गुप्ता के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने तथा की गई कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
सहयोग पोर्टल CM का जनता की सुविधा के लिए प्रयोग
इस कार्रवाई पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा है कि सहयोग पोर्टल मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
का जनता की सुविधा और उनकी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए किया गया महत्वपूर्ण प्रयोग है। जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना अथवा राजस्व कार्यों में लापरवाही और मनमानी करना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सहयोग पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। सोनू गुप्ता का निलंबन इसी नीति का हिस्सा है। राजस्व विभाग में जनता के कार्यों के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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मंत्री ने कहा कि दाखिल-खारिज आम जनता से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण काम है। जमीन खरीदने के बाद लोग दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर लगाते हैं। यदि कर्मचारी इसमें भी पैसा मांगता है या जानबूझकर फाइल लटकाता है तो यह गंभीर अपराध है। सरकार ऐसे कर्मचारियों को बख्शेगी नहीं। सहयोग पोर्टल पर हर शिकायत की मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रही है। इसलिए किसी भी शिकायत को हल्के में न लें।
क्या है पूरा मामला?
विभागीय सूत्रों के अनुसार, भोजपुर के शाहपुर अंचल में दो दाखिल-खारिज के मामलों में शिकायत आई थी। एक व्यक्ति ने सहयोग पोर्टल पर शिकायत की थी कि उसके दाखिल-खारिज के आवेदन को बिना कारण बताए लंबे समय से लटकाया जा रहा है। कर्मचारी सोनू गुप्ता ने कागजात पूरे होने के बाद भी रिपोर्ट नहीं लगाई और आवेदक से बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाए। दूसरे मामले में बिना स्थल जांच के ही दाखिल-खारिज की अनुशंसा कर दी गई, जिसमें बाद में गड़बड़ी मिली।
शिकायत मिलने के बाद समाहर्ता भोजपुर ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में पाया गया कि कर्मचारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और मनमाने तरीके से काम किया। समाहर्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट विभाग को भेजी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कर्मचारी को निलंबित कर दिया। विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी नजीर बनेगी।