logo

मूड

ट्रेंडिंग:

गुजरात में केजरीवाल को झटका, AAP विधायक चैतर वसावा को 7 साल की जेल

आम आदमी पार्टी गुजरात के बड़े आदिवासी नेता और विधायक चैतर वसावा को कोर्ट ने सात साथ की सजा सुनाई है। यह मामला क्या है? इस खबर में जानिए...

Chaitar Vasava

चैतर वसावा। Photo Credit- Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

गुजरात विधानसभा चुनाव की जोर-शोर से तैयारी कर रही आम आदमी पार्टी (AAP) को जोरदार झटका लगा है, जिससे संभलने में पार्टी को मुश्किल होगी। गुजरात की एक कोर्ट 'आप' के विधायक, वरिष्ठ और बड़े आदिवासी नेता चैतर वसावा और और उनकी पत्नी शकुंतला वसावा के साथ में आठ अन्य लोगों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है।

 

गुजरात के राजपीपला की एक स्थानीय कोर्ट ने मंगलवार को विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी सहित आठ अन्य लोगों को वन अधिकारियों पर हमले और उगाही के एक मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। एडिशनल सेशन जज एवी हीरपारा ने 30 अक्टूबर 2023 की रात में हुई घटना से जुड़े मामले में चैतर वसावा को दोषी पाया।

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली में हर झुग्गीवासी को घर देगी BJP सरकार? समझिए क्या है प्लान

सरकारी पक्ष ने क्या आरोप लगाया था?

सरकारी पक्ष के मुताबिक, वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से उगाई गई फसल हटाई थी, जिसके बाद विवाद हो गया था। अधिकारियों को डेडियापाडा कस्बे स्थित विधायक चैतर वसावा के घर पर बुलाया गया था। उनके घर पर इसको लेकर चर्चा हुई थी, जहां चर्चा के दौरान विवाद बढ़ गया था। 

 

सरकारी पक्ष के मुताबिक, चैतर वसावा और अन्य आरोपियों ने वन अधिकारियों को धमकाया। आरोप है कि चैतर वसावा ने इस दौरान हवा में एक गोली भी चलाई।

 

अपनी पार्टी के विधायक की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, 'ED पार्टी ने षड्यंत्र करके गुजरात के बेहद लोकप्रिय नेता चैतर वसावा को सात साल की जेल करवा दी। गुजरात की जनता इसका बदला लेगी।'

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: फुटपाथ पर सो रही बच्ची को उठा ले गया कैब ड्राइवर, दुष्कर्म के बाद की हत्या

चैतर गुजरात के बड़े आदिवासी नेता

डेडियापाडा (अनुसूचित जनजाति) विधानसभा क्षेत्र से विधायक चैतर गुजरात के बड़े आदिवासी नेता हैं। वसावा और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ नवंबर 2023 में भारतीय दंड संहिता की दंगा, उगाही और सरकारी अधिकारियों पर हमले से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी आरोप लगाए गए थे।


और पढ़ें