बिहार के मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और शिक्षकों का सम्मान बढ़ाने के लिए कई बड़े एलान किए हैं। अब वित्त रहित शिक्षकों यानी जिन स्कूलों को सरकार से पूरा पैसा नहीं मिलता, वहां पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए अलग वेतनमान बनाया जाएगा। इसके अलावा, बिहार में शिक्षकों को ट्रेनिंग देने के लिए एक अलग यूनिवर्सिटी भी बनाई जाएगी। शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान करना और बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ कई अहम फैसले लिए गए हैं, जो आने वाले समय में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और अच्छा बदलाव लाने की मजबूत नींव रखेंगे।
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ट्रेनिंग के लिए अलग से बनेगी यूनिवर्सिटी
CM की इन घोषणाओं का भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्वागत किया है और इसे शिक्षकों के हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव डालने वाला कदम है। अभी तक शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग संस्थान हैं। एक समर्पित विश्वविद्यालय बनने से शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों, नई तकनीकों और बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने में मदद मिलेगी।
उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में शिक्षक प्रशिक्षण को संस्थागत और आधुनिक स्वरूप देना राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। इस विश्वविद्यालय में न सिर्फ बीएड और डीएलएड बल्कि नई शिक्षा नीति के अनुसार शोध और इनोवेशन पर भी काम होगा।
लंबे समय की यह मांग होगी पूरी
मुख्यमंत्री की दूसरी सबसे बड़ी घोषणा वित्त रहित शिक्षकों को लेकर है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों के लिए अलग वेतनमान की व्यवस्था करने की घोषणा शिक्षकों के हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हजारों वित्त रहित शिक्षक वेतनमान की मांग कर रहे थे।
सरकार के इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी जो बिना सरकारी अनुदान के सालों से स्कूल-कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। यह सरकार की संवेदनशील सोच का परिचायक है। उन्होंने इस निर्णय को शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम बताया। वेतनमान तय होने से न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि उनका सम्मान भी बढ़ेगा।
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शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण
तीसरी बड़ी घोषणा तकनीक को लेकर है। संजय सरावगी ने कहा कि शिक्षकों को एआई की नई तकनीकों का प्रशिक्षण देना समय की जरूरत है। आज पूरी दुनिया AI की तरफ बढ़ रही है और ऐसे में बिहार के शिक्षकों को भी इससे लैस करना जरूरी है। बिहार में आधुनिक एआई इकोसिस्टम विकसित करना और छात्रों के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू का सेंटर खोलना एक बड़ा कदम है। इससे राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा, तकनीक और रिसर्च के मौके मिलेंगे। बीएचयू का सेंटर खुलने से बिहार के छात्रों को पढ़ाई और रिसर्च के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
संस्कृत बोर्ड और मदरसा शिक्षकों का रुका वेतन मिलेगा
मुख्यमंत्री ने संस्कृत बोर्ड और मदरसा बोर्ड के शिक्षकों के लिए भी बड़ी राहत दी है। लंबे समय से इन शिक्षकों का वेतन लंबित था। सरकार ने अब लंबित वेतन का भुगतान जारी करने का निर्णय लिया है। सरावगी ने कहा कि यह निर्णय भी सरकार की संवेदनशीलता और शिक्षकों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इससे संबंधित हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था में उनका भरोसा और मजबूत होगा।