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बिहार में मनमानी नहीं कर पाएंगे प्राइवेट स्कूल, CM सम्राट चौधरी का बड़ा एलान

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा एलान किया है। उनका कहना है कि मनचाहे तरीके से फीस नहीं बढ़ाई जाएगी।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, Photo Credit: PTI

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा और सख्त संदेश दिया है। लगातार बढ़ती फीस, हर साल किताबें बदलने की मजबूरी और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण की शिकायतों के बीच सरकार अब ऐक्शन मोड में दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि राज्य में निजी विद्यालय अब मनमाने तरीके से नियम नहीं चला सकेंगे। सरकार ने फीस नियंत्रण, पारदर्शिता और अभिभावकों के अधिकारों को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए हैं।

 

पिछले कुछ समय से बिहार के विभिन्न जिलों में अभिभावक निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और अनिवार्य खरीदारी व्यवस्था को लेकर लगातार विरोध जता रहे थे। कई स्कूल हर साल नई किताबें लागू कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे थे। यूनिफॉर्म और स्टेशनरी भी तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा है कि अब राज्य के सभी निजी विद्यालयों को फीस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूलों को यह बताना अनिवार्य होगा कि किस मद में कितनी फीस ली जा रही है। बिना उचित कारण फीस में भारी बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि पारदर्शिता आने से अभिभावकों को राहत मिलेगी और स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी।

स्कूल नहीं कर पाएंगे अभिभावकों को मजबूर

सबसे महत्वपूर्ण फैसला किताब और यूनिफॉर्म को लेकर लिया गया है। अब कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान से सामान खरीद सकेंगे। सरकार का यह कदम उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो हर साल महंगे पैकेज खरीदने को मजबूर होते थे।

 

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सरकार ने फीस बकाया रहने पर बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि फीस जमा नहीं होने की स्थिति में किसी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा और न ही उसका रिजल्ट रोका जा सकेगा। कई निजी स्कूल फीस बकाया होने पर छात्रों को मानसिक दबाव में डालते थे, जिस पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

 

सरकार ने साफ कर दिया है कि जो निजी विद्यालय इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग को भी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है ताकि नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का किया है स्वागत

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो बिहार में निजी शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह और संतुलित बन सकती है। इससे मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी तथा शिक्षा के नाम पर होने वाली अव्यवस्था पर भी अंकुश लगेगा।

 

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सरकार के इस फैसले के बाद अभिभावकों में राहत की भावना देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद सरकार ने उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुना है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन आदेशों को जमीन पर कितनी मजबूती से लागू कर पाता है।


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