संजय सिंह, पटना। गरीबी, जरूरत और जल्दी पैसे पाने की मजबूरी को हथियार बनाकर ठगों ने पूर्णिया में ऐसा जाल बिछाया कि दर्जनों महिलाएं अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठीं। सिर्फ 5 हजार रुपये जमा करें और अगले दिन खाते में 1 लाख 60 हजार रुपये का लोन पाएं। इस एक वादे ने सैकड़ों परिवारों के सपनों को उम्मीद दी, लेकिन कुछ ही दिनों में यही उम्मीद सबसे बड़े धोखे में बदल गई।
सदर थाना क्षेत्र में सहायता माइक्रो फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से खुले एक कार्यालय ने खुद को गरीब महिलाओं का सहारा बताकर विश्वास जीतना शुरू किया। इलाके में प्रचार किया गया कि कंपनी बिना किसी जटिल प्रक्रिया के बड़ी राशि का लोन उपलब्ध कराएगी। महिलाओं को बताया गया कि उन्हें केवल रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में 5 हजार रुपये जमा करने होंगे, बाकी काम कंपनी करेगी।
आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाएं हुई ठगी की शिकार
आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं के लिए यह प्रस्ताव किसी वरदान से कम नहीं था। किसी ने घर खर्च के लिए, किसी ने बेटी की पढ़ाई के लिए तो किसी ने छोटे कारोबार की उम्मीद में पैसे जमा कर दिए। देखते ही देखते दर्जनों महिलाएं कंपनी के झांसे में आ गईं और हजारों रुपये जमा होने लगे।
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किराए के भवन में खोला गया कार्यालय
बताया जाता है कि राहुल रंजन सिंह नाम के व्यक्ति अपने सहयोगियों सोनू और सुधांशु के साथ घर-घर जाकर लोगों को भरोसा दिलाता था कि लोन की राशि अगले ही दिन बैंक खाते में पहुंच जाएगी। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए कार्यालय खोला गया, दस्तावेज दिखाए गए और बाकायदा उद्घाटन समारोह भी आयोजित किया गया। इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हो गया।
28 मई को गुलाबबाग जीरो माइल स्थित कब्रिस्तान टोला में किराये के कमरे से शुरू हुआ यह कार्यालय कुछ ही दिनों में महिलाओं की भीड़ से भरने लगा। 2 जून को उद्घाटन हुआ और लोगों ने इसे एक वैध वित्तीय संस्था समझकर पैसे जमा करने शुरू कर दिए। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह पूरा खेल पहले से रची गई ठगी की पटकथा का हिस्सा है।
उद्घाटन के दो दिन बाद ही कार्यालय बंद
उद्घाटन के महज दो दिन बाद अचानक कार्यालय बंद हो गया। जब महिलाएं लोन की स्थिति जानने पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला। कार्यालय खाली था और संचालकों का कोई पता नहीं था। कुछ देर तक लोग इंतजार करते रहे, लेकिन जब फोन भी बंद मिलने लगे तो उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ बड़ा धोखा हो चुका है।
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पीड़ित महिलाओं में कल्याणी कुमारी, सुकनी देवी, ममता कुमारी, टुनटुन देवी, रीनू देवी और चंद्रकला देवी समेत कई नाम शामिल हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने भरोसे में आकर अपनी जमा पूंजी दे दी थी। अब न लोन मिला और न ही जमा किए गए पैसे वापस मिलने की कोई उम्मीद दिखाई दे रही है।
आरोपियों का मोबाइल नेटवर्क संदिग्ध
मामले को और संदिग्ध बनाता है आरोपियों का मोबाइल नेटवर्क। पीड़ितों का आरोप है कि जिस नंबर से संपर्क किया जाता था, उसे दूसरे नंबरों पर फॉरवर्ड कर दिया गया है, जिससे किसी भी आरोपी तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में महिलाएं सदर थाना पहुंचीं और लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, किरायानामा, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध है।
आरोपियों में लोगों को लालच में फसाया
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपियों ने पहले भरोसा पैदा किया, फिर लालच का जाल फैलाया और पर्याप्त रकम इकट्ठा होते ही फरार हो गए। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह गिरोह अन्य जिलों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम तो नहीं दे चुका है।
पूर्णिया की यह घटना एक बार फिर बताती है कि आसान लोन और त्वरित मुनाफे के लालच में लिया गया एक फैसला जीवनभर की जमा पूंजी छीन सकता है। फिलहाल ठगी की शिकार महिलाएं अपने पैसे वापस मिलने की आस में पुलिस कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं।