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'3 डिसमिल जमीन मिलेगी', अफवाह के बाद पटना में सचिवालय के बाहर जुटी भारी भीड़

पटना में तीन डिसमिल जमीन मिलने की बात सुनकर बड़ी संख्या में भूमिहीन लोग मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच गए। जांच में इस दावे की कोई पुष्टि नहीं हुई और जमीन देने की बात अफवाह निकली।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- ChatGPT

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बिहार के पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर बुधवार को हजारों लोगों की भीड़ जुट गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, हाथों में आवेदन लेकर सचिवालय के बाहर पहुंचने लगीं। लोगों के बीच यह बात फैल गई थी कि बिहार सरकार भूमिहीन लोगों को तीन डिसमिल जमीन देने जा रही है। इसी उम्मीद में बिहार के अलग-अलग जिलों से लोग पटना पहुंच गए। सचिवालय के बाहर महिलाओं की लंबी कतार देखकर हर किसी के मन में सवाल था कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग यहां क्यों पहुंचे हैं? क्या सच में सरकार भूमिहीन लोगों को जमीन देने जा रही है? जब इस बात की जांच की गई तो मामला कुछ और निकला।

 

मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर महिलाओं की लंबी कतार लगी थी। किसी के हाथ में आवेदन था तो कोई छोटे बच्चों को गोद में लेकर पहुंची थी। भीड़ में जहानाबाद, गया, दरभंगा, मधुबनी, जमुई समेत बिहार के अलग-अलग जिलों से आए लोग शामिल थे। सचिवालय के गेट के बाहर गर्मी में लोग घंटों खड़े रहे। कई महिलाएं ऐसी थीं जो पहली बार पटना आई थीं। उनके मन में जमीन मिलने की उम्मीद थी।

 

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कई महिलाओं ने बताया कि वे भूमिहीन हैं और इसी उम्मीद में यहां तक पहुंची हैं। कुछ महिलाओं ने कहा कि वे सड़क किनारे या अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि कई बार सड़क किनारे बने उनके आशियाने को प्रशासन के बुलडोजर से हटा दिया जाता है। इसी वजह से वे मुख्यमंत्री से अपने लिए जमीन और घर की मांग करने पहुंची थीं।

ऐसे फैली जमीन की बात

जब आवेदन लेकर पहुंची महिलाओं से पूछा गया कि उन्हें तीन डिसमिल जमीन देने की बात किसने बताई तो ज्यादातर का जवाब एक जैसा था। उनका कहना था कि उन्होंने यह बात एक-दूसरे से सुनी है। एक महिला ने बताया कि गांव में किसी ने कहा था कि मुख्यमंत्री भूमिहीन लोगों को जमीन दे रहे हैं और इसके लिए आवेदन देना होगा। इसी बात पर वह अपने बच्चों को लेकर पटना चली आई।

 

कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें यह जानकारी व्हाट्सएप और गांव में हुई चर्चा से मिली। कुछ महिलाओं ने कहा कि वे भूमिहीन हैं और सड़क किनारे या अस्थायी जगहों पर रहती हैं। वहीं कुछ ऐसी महिलाएं भी मिलीं जिन्होंने बताया कि उनके माता-पिता तक नहीं हैं। इसी उम्मीद में वे अपने छोटे बच्चों को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंची थीं। एक महिला ने बताया कि उसका पति मजदूरी करता है और उनका अपना घर नहीं है। उसने सुना था कि सरकार जमीन देगी इसलिए वह आवेदन लेकर पटना आ गई।

 

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जमीन की बात अफवाह निकली

जब इस पूरे मामले की जांच की गई तो बात कुछ और सामने आई। मुख्यमंत्री सचिवालय में लोगों से जो आवेदन लिए जा रहे थे उसमें कहीं भी तीन डिसमिल जमीन देने की बात नहीं लिखी थी। यह एक सामान्य शिकायत वाला आवेदन था जैसा मुख्यमंत्री के सहयोग कार्यक्रम में लिया जाता है। इस आवेदन में जमीन, मारपीट, पेंशन, राशन कार्ड जैसी अलग-अलग समस्याओं के बारे में शिकायत की जा सकती है। इसमें तीन डिसमिल जमीन देने की किसी खास योजना का कोई जिक्र नहीं था। इसके बाद सचिवालय में आवेदन लेने वाले अधिकारियों से भी इस बारे में बात की गई।

 

अधिकारियों ने साफ कहा कि इस आवेदन के जरिए तीन डिसमिल जमीन देने की कोई योजना नहीं है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री के सहयोग कार्यक्रम में लोग अपनी अलग-अलग समस्याएं लेकर आवेदन देते हैं। मामला जमीन से जुड़ा हो, मारपीट का हो या किसी दूसरी परेशानी का, लोग अपनी शिकायत लेकर यहां पहुंच सकते हैं। उनकी समस्या सुनी जाती है और यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

 

यानी मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर हजारों लोगों की भीड़ जरूर पहुंची लेकिन तीन डिसमिल जमीन देने की बात की कहीं से पुष्टि नहीं हुई। न तो आवेदन में ऐसी किसी योजना का जिक्र था और न ही सचिवालय के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। जांच में सामने आया कि तीन डिसमिल जमीन देने की बात अफवाह थी। लोगों तक यह बात एक-दूसरे से सुनकर पहुंची और इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में भूमिहीन लोग मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच गए। कई लोग सुबह 4 बजे ही घर से निकलकर पटना पहुंच गए थे। दोपहर तक सचिवालय के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही।


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