बिहार के गया जिले में रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह के मकान पर सोमवार को हुई पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त छापेमारी ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी। कोतवाली थाना क्षेत्र के न्यू एरिया पिपरपांती मोहल्ले में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध नशीली और नकली दवाओं के मिलने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, ड्रग विभाग को लंबे समय से इस परिसर में अवैध दवा कारोबार चलने की गुप्त सूचना मिल रही थी। सूचना के सत्यापन के बाद जिला पुलिस और औषधि विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा। जिस मकान में कार्रवाई की गई, वहां किराए पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का कार्यालय भी संचालित बताया जा रहा है।
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पूरे इलाके को पुलिस ने घेरा, लोगों की लगी भीड़
अचानक हुई छापेमारी से पिपरपांती मोहल्ले में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। मकान के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई और पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अधिकारियों की टीम घंटों तक परिसर के अंदर जांच और छानबीन करती रही। कई संदिग्ध कार्टन और दवा के पैकेटों की जांच की गई। हालांकि, बरामद सामग्री की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नशीली दवाएं मिली हैं लेकिन पूरी जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद दवाओं के सैंपल की जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दवाएं नकली थीं या अवैध तरीके से संग्रहित की गई थीं।
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कौन थे रंग सिंह?
रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह झारखंड के चतरा लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी अलग पहचान रही थी। कुछ वर्ष पहले उनका निधन हो चुका है। अब उनके गया स्थित मकान पर हुई इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस छापेमारी के बाद गया शहर में अवैध दवा कारोबार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर रिहायशी इलाके में इतने बड़े स्तर पर संदिग्ध दवाओं का भंडारण कैसे किया जा रहा था। फिलहाल पुलिस और ड्रग विभाग मामले की तह तक जाने में जुटा है।