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जमुई नाबालिग की फोटो शेयर करने पर घिरे सम्राट चौधरी, RJD ने की कार्रवाई की मांग

RJD ने जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करने को लेकर मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए हैं। RJD प्रतिनिधिमंडल ने बाल अधिकार और महिला आयोग से मिलकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।

tejashwi yadav and samrat choudhary

तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी, Photo Credit- PTI

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बिहार में जमुई यौन उत्पीड़न कांड की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे पर सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। RJD के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों ने बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बिहार राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष से मिलकर मुख्यमंत्री के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। RJD ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा खुलेआम पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन कर कानून का मजाक बनाया जाएगा तो फिर इस कानून का क्या औचित्य रह जाएगा।

 

RJD का प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप से मिला और ज्ञापन सौंपा। इसके बाद दूसरा प्रतिनिधिमंडल बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा से मिला। दोनों आयोगों को सौंपे गए ज्ञापन में RJD ने कहा है कि जमुई जिले की यौन उत्पीड़न की एक नाबालिग पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री बिहार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रकाशित की थी लेकिन बिहार पुलिस और संबंधित एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। RJD का कहना है कि इस मामले की पूरे देश में आलोचना हुई लेकिन मुख्यमंत्री ने अभी तक खेद प्रकट कर माफी नहीं मांगी है।

 

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RJD ने CM पर उठाए सवाल

RJD द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जमुई जिले में एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी जो पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी थी। मुख्यमंत्री ने इस पीड़िता से मुलाकात की और उसके बाद उसकी तस्वीर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक, थ्रेड और एक्स पर प्रकाशित और साझा कर दी। RJD का आरोप है कि यह सीधे तौर पर पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन है। किसी भी यौन पीड़िता, खासकर नाबालिग की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है।

 

ज्ञापन में कहा गया है कि इस मामले की मीडिया, सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है लेकिन मुख्यमंत्री ने अभी तक खेद प्रकट कर माफी नहीं मांगी है। RJD ने कहा कि बिहार पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने भी अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। RJD ने सवाल उठाया कि अगर आम आदमी ऐसा करता तो उसके खिलाफ FIR दर्ज हो जाती लेकिन मुख्यमंत्री होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। RJD ने आयोग से मांग की है कि मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाए।

 

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

RJD ने अपने ज्ञापन में मुख्यमंत्री के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 23(2), धारा 23(4), किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74(1), धारा 74(3) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 72(1) के तहत कार्रवाई की मांग की है। इन धाराओं में यौन उत्पीड़न की पीड़िता की पहचान उजागर करने को अपराध माना गया है और सजा का प्रावधान है।

 

RJD ने सुप्रीम कोर्ट के निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ मामले का भी हवाला दिया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 दिसंबर 2018 के आदेश में स्पष्ट किया था कि पॉक्सो एक्ट की पीड़िता सहित किसी भी यौन उत्पीड़न की पीड़िता का नाम, पता, फोटो या ऐसी कोई जानकारी, जिससे उसकी पहचान हो सके, किसी भी मीडिया, सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से प्रकाशित नहीं की जा सकती। RJD का कहना है कि मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पीड़िता की फोटो शेयर की बल्कि इससे उसकी पहचान भी उजागर हो गई। इससे पीड़िता और उसके परिवार को सामाजिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। RJD ने इसे बाल अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

 

सूत्रों के मुताबिक, दोनों आयोगों ने RJD के ज्ञापन को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की बात कही है। बाल आयोग के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में है और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। महिला आयोग की अध्यक्ष ने भी कहा कि पीड़िता की पहचान उजागर करना गलत है और इस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। इस मामले के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है।


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