बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (
SIR
) को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
ने पलटवार किया है। सम्राट चौधरी ने सभी आरोपों को तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया है। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में SIR की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है। SIR के दौरान किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं काटा गया है और दावा-आपत्ति के लिए पूरी प्रक्रिया उपलब्ध रही। उन्होंने कांग्रेस नेता
राहुल गांधी
और RJD नेता तेजस्वी यादव द्वारा SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर भी जवाब दिया और कहा कि निर्वाचन आयोग संबंधित मामलों पर पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे भ्रम फैलाने में लगे हैं। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज हुई है। एक गरीब का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना यह विपक्ष को नहीं पच रहा है। देश अच्छे से चल रहा है और विपक्ष को यह बात पसंद नहीं है।'
यह भी पढ़ें: कोसी की गाद से निपटेंगे, नया बैराज बनेगा, सीएम सम्राट ने दिए निर्देश
SIR में मतदाता सूची का हुआ सत्यापन
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में 24 जून 2025 से 25 जुलाई 2025 तक SIR की प्रक्रिया चली। इस दौरान मतदाता सूची में शामिल नामों का सत्यापन किया गया। SIR के दौरान मृत लोगों, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों और एक से अधिक जगहों पर दर्ज मतदाताओं से जुड़ी जानकारी का सत्यापन किया गया। कई जगहों पर ऐसे मामले मिले थे जहां एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह मतदाता सूची में दर्ज था। कई लोग वर्षों पहले बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में चले गए थे लेकिन उनका नाम अभी भी यहां की मतदाता सूची में था। कई मृत लोगों के नाम भी सूची में दर्ज थे। इन्हीं सबको ठीक करने के लिए SIR कराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'जिन लोगों की पात्रता को लेकर कोई समस्या थी उनके लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध रही। हर बूथ पर BLO तैनात थे और हर अनुमंडल में सुनवाई की व्यवस्था थी। यदि किसी का नाम गलती से कट गया हो तो वह दावा कर सकता था।' ECI ने भी पात्र मतदाता का नाम छूटने पर दावा दाखिल करने और गलत नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया बताई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'वर्ष 2003 में जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं तब भी SIR कराया गया था और वर्ष 2025 में जब
नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री थे उस समय भी SIR कराया गया। तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। निर्वाचन आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया था ताकि वर्तमान SIR में पात्र मतदाता अपने पुराने विवरण का सत्यापन कर सकें। SIR के नाम पर विपक्ष अब भ्रम फैला रहा है और विपक्षी नेताओं के पास कोई फैक्ट नहीं है सिर्फ आरोप लगाए जा रहे हैं।'
SIR पर राहुल और तेजस्वी के सवालों का जवाब
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर मतदाता विवरण का सत्यापन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आधार कार्ड को भी पहचान से जुड़े दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आधार पहचान साबित करने के लिए स्वीकार्य है लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव द्वारा SIR को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए कहा, 'निर्वाचन आयोग संबंधित मामलों पर स्थिति स्पष्ट कर चुका है। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या किसी तरह की वास्तविक शिकायत है तो उसे तय प्रक्रिया के तहत सामने लाया जाना चाहिए। विपक्ष को यदि कोई ठोस शिकायत है तो वह चुनाव आयोग के पास जाए और दस्तावेज दिखाए। मतदाता सूची में समय-समय पर नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और मृत्यु, स्थानांतरण तथा अन्य कारणों से जरूरी बदलाव किए जाते हैं। हर साल नए युवा 18 साल के होते हैं उनका नाम जोड़ा जाता है और जिन लोगों की मृत्यु हो जाती है उनका नाम हटाया जाता है। यह सामान्य प्रक्रिया है।'
यह भी पढ़ें: बिहार में भूमि सर्वे की धीमी रफ्तार पर मंत्री सख्त, खराब काम पर होगी कार्रवाई
मोदी सरकार पर भी बोले सम्राट
मुख्यमंत्री ने कहा, 'विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन उन्हें तथ्य और प्रमाण के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। चुनाव से जुड़ी किसी शिकायत के लिए निर्वाचन आयोग के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था भी उपलब्ध है। अगर किसी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो वह कोर्ट जा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग और न्यायालय महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो चुनाव कराता है। उस पर बेवजह आरोप लगाना ठीक नहीं है।'
मुख्यमंत्री ने कहा, 'लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज हुई है। एक गरीब का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना यह विपक्ष को नहीं पच रहा है। देश अच्छे से चल रहा है और विपक्ष को यह बात पसंद नहीं है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे भ्रम फैलाने में लगे हैं। जब से मोदी सरकार आई है देश में गरीब कल्याण की योजनाएं तेजी से चल रही हैं।'