बिहार के पूर्वी चंपारण में जितिया पर्व के मौके पर परिवार के साथ तालाब पर स्नान करने गई पांच बच्चियां डूब गईं। इस दौरान एक बच्ची को स्थानीय ग्रामीणों ने बचा लिया लेकिन गहरे पानी में डूबने से चार बच्चियों की मौत हो गई। बाद में 4 बच्चियों के शव को स्थानीय ग्रामीणों ने तालाब से बाहर निकाला। मिली जानकारी के अनुसार पहाड़पुर थाना क्षेत्र के बनकट नुनिया टोली की महिलाएं जितिया पर्व पर स्नान के लिए तालाब पर गई थीं।
यह घटना घटना पहाड़पुर थाना क्षेत्र के बनकट नुनिया टोली की बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चियों के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जितिया पर्व पर जहां हर घर में खुशी होनी थी, वहां मातम छा गया।
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पोखरे पर परिवार के साथ स्नान करने गई थीं बच्चियां
जितिया पर्व पर महिलाएं सुबह-सुबह तालाब में स्नान करने जाती हैं। इसी परंपरा के तहत बनकट नुनिया टोली की महिलाएं भी गांव के बाहर स्थित पोखरे पर स्नान करने गई थीं। महिलाओं के साथ उनके घर की छोटी-छोटी बच्चियां भी चली गईं। महिलाएं स्नान कर रही थीं और बच्चियां भी किनारे पर नहा रही थीं। इसी दौरान बच्चियां खेलते-खेलते गहरे पानी में चली गईं और अचानक पांचों बच्चियां डूबने लगीं।
बच्चियों को डूबते देख महिलाओं ने शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़कर तालाब पर पहुंचे। ग्रामीणों ने तुरंत तालाब में छलांग लगा दी और बच्चियों को बचाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने एक बच्ची को बाहर निकाल लिया, लेकिन चार बच्चियां गहरे पानी में डूब गईं।
बाद में ग्रामीणों ने तालाब में खोजबीन कर चारों बच्चियों के शव बाहर निकाले। शवों को बाहर निकालते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। मृत बच्चियों की पहचान बनकट नुनिया टोली के प्रमोद महतो की पुत्री सोनोमति कुमारी और फुलमति कुमारी, विरेंद्र महतो की पुत्री सोनाली कुमारी और अच्छेलाल पासवान की पुत्री प्रतिमा कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सोनोमति और फुलमति दोनों सगी बहनें थीं। एक ही घर की दो बेटियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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गांव वालों ने क्या बताया?
ग्रामीणों ने बताया कि पोखरे में पहले से ही गहरे गड्ढे थे और बारिश के कारण पानी भी ज्यादा था। बच्चियों को गहराई का अंदाजा नहीं लगा और वे डूब गईं। ग्रामीणों ने कहा कि पोखरे की गहराई काफी ज्यादा है और किनारे पर फिसलन भी थी। इस गांव में त्योहार के दिन ही चार बच्चियों की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। जिन माताओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा था, उन्हीं के सामने यह हादसा हो गया।
प्रशासन ने इस घटना पर दुख जताया है। स्थानीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। अधिकारियों ने कहा कि मृतक के परिजनों को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि सभी मृतक बच्चियां नाबालिग हैं और यह घटना आपदा की श्रेणी में आती है। इसलिए परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।