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3 साल बाद भी UP में GPO भर्ती फाइनल नहीं, 6113 छात्र बेहाल; आयोग ने साधी चुप्पी

यूपी में 2023 में ग्राम पंचायत अधिकारी की नौकरी निकाली गई। 2025 में मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया। इसी साल दस्तावेज सत्यापन हो जाने के बावजूद हजारों छात्र फाइनल रिजल्ट के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। डिप्टी सीएम से मंत्री तक गुहार लगाई। मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

Students Protest

फाइनल रिजल्ट जारी करने की मांग करते छात्र।

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सरकारी परीक्षाओं के इंतजार में उम्र बीत जाती है। समय पर परीक्षा होती है तो रिजल्ट का लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार उम्र के आखिरी पड़ाव पर लंबी जद्दोजहद के बाद नौकरी मिल पाती है। परीक्षाओं और उसके बाद रिजल्ट में होने वाली देरी न केवल युवाओं के हौसले को तोड़ती है, बल्कि उन्हें दर-दर की ठोकरने खाने पर भी मजबूर करती है।

 

उत्तर प्रदेश में हजारों युवा ग्राम पंचायत अधिकारी (GPO) परीक्षा के फाइनल रिजल्ट के इंतजार में बैठे हैं। अभ्यर्थी रवि पांडे ने बताया कि उन्होंने पिछले साल ग्राम पंचायत अधिकारी (GPO) की मुख्य परीक्षा दी थी। एक साल से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अंतिम रिजल्ट जारी नहीं किया गया। 

 

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रवि ने बताया कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग साल में एक बार प्रारंभिक पात्रत्रा परीक्षा (PET) करवाता है। छात्रों को मिले अंकों के आधार पर वैकेंसी आती है। इसके बाद छात्रों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। साल 2022 में प्रारंभिक पात्रत्रा परीक्षा आयोजित की गई। जनवरी 2023 में रिजल्ट आया।

 

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिलते अभ्यर्थी।

मई 2023 में ही ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती आ आई। 1468 पद भरे जाने थे। मुख्य परीक्षा के लिए 66 हजार छात्रों को शॉर्टलिस्ट किया गया। मगर लंबे समय तक परीक्षा आयोजित नहीं की गई। विरोध प्रदर्शन के बाद अप्रैल 2025 में मुख्य परीक्षा आयोजित की गई।

 

इसमें लगभग 32 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा देरी से आयोजित होने के कारण बहुत सारे बच्चों ने तैयारी छोड़ दी थी। कुछ का अन्य जगहों पर चयन हो गया। इस कारण मुख्य परीक्षा में इतने कम अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। कई महीनों के बाद आयोग ने 17 अक्टूबर 2025 को मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी किया। 6113 छात्रों को दस्तावेज सत्यापन के लिए पास किया गया। 7 अप्रैल से 6 मई के बीच आयोग ने ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन करवाया। लेकिन अभी तक फाइनल रिजल्ट जारी नहीं किया। 

शूटर बनने का सपना भी टूट रहा

24 वर्षीय रवि पांडे शूटिंग प्लेयर हैं और प्री स्टेट खेल चुके हैं। स्टेट लेवल पर क्वालिफाई किया, लेकिन दिल्ली जाने का पैसा नहीं था। रवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं। मगर घर की स्थिति राह में रोड़ा बनी तो सरकारी नौकरी हासिल करके सपना पूरा करने की ठानी।

 

 

बेहद साधारण परिवार से आने वाले रवि के पिता किसान हैं। किसानी पर भी पूरा घर निर्भर है। वे बताते हैं कि शूटिंग एक महंगा खेल है। उसके उपकरण बेहद महंगे हैं। सोचा था कि सरकारी नौकरी हासिल करके शूटिंग में देश के लिए बेहतर कर पाऊंगा, लेकिन पिछले एक साल से रिजल्ट जारी नहीं होने से अब सब्र और सपने दोनों टूटने लगे हैं। दर-दर की ठोकरे खानी पड़ रही हैं। 

 

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मंत्री से डिप्टी सीएम तक लगाई गुहार, आयोग नहीं दे रहा सटीक जवाब

रवि की ही तरह लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले आदित्य प्रताप सिंह के पिता किसान है। वे पिछले लंबे समय से तैयारी करने के उद्देश्य से लखनऊ में रहते हैं। आदित्य बताते हैं कि वे घर में बड़े हैं। इस वजह से उन पर जिम्मेदारी भी अधिक हैं। सोचा था कि होली से पहले परीक्षा क्लियर हो जाएगी और तैनाती मिल जाएगी। लेकिन अभी तक फाइनल रिजल्ट का इंतजार है। 

 

उनका कहना है कि एक मध्यम वर्गीय परिवार से होने के नाते लखनऊ में किराये पर रहकर लंबे समय तक तैयारी करना बेहद मुश्किल है। फाइनल रिजल्ट नहीं जारी होने से छात्रों की उम्मीद और हौसला अब टूटने लगा है।

 

उन्होंने बताया कि छात्रों ने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और पंचायत राज मंत्री ओपी राजभर से मुलाकात की। कई बार आयोग के चक्कर लगाए। लेकिन अभी तक किसी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उनका कहना है कि एक साल बाद 2023 में आयोजित प्रारंभिक पात्रत्रा परीक्षा (PET) से जुड़ी मंडी सचिव, एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट और ऑडिटर जैसी वैकेंसी क्लियर हो चुकी, लेकिन अभी तक 2022 PET से जुड़ी भर्ती लटकी है।  

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