logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बिना परमिट नहीं चलेंगे ई-रिक्शा! यूपी सरकार केंद्र को भेजेगी प्रस्ताव

राजधानी लखनऊ में ई-रिक्शा के कारण जाम की समस्या को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार परमिट में मिली छूट को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। सरकार लगातार पैरवी करने का भी दावा कर रही है।

e rickshaw permit up

प्रतीकात्मक फोटो, Photo Credit : Chat GPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

लखनऊ। ई-रिक्शा के बढ़ते संचालन और इससे शहरों में लग रहे जाम पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार अब बड़ी पहल करने जा रही है। सरकार ई-रिक्शा को परमिट से मिली छूट खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। इसके लिए 15 दिन के अंतराल पर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर मामले में कार्रवाई की पैरवी की जाएगी। सरकार इस बार ई-रिक्शा को परमिट से छूट देने वाले नोटिफिकेशन को रद्द करने का अनुरोध करेगी।

 

केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से करीब आठ साल पहले जारी आदेश में बदलाव होने के बाद ई-रिक्शा को परमिट के दायरे में लाने का रास्ता साफ हो सकेगा। इसका असर केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि देशभर में ई-रिक्शा के संचालन पर पड़ सकता है। मौजूदा नियमों में ई-रिक्शा को परमिट से छूट होने के कारण इनकी संख्या और संचालन को नियंत्रित करना राज्य सरकार के लिए मुश्किल बना हुआ है। 

बढ़ती संख्या और अनियंत्रित संचालन से जाम

राजधानी लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और अनियंत्रित संचालन से जगह-जगह जाम की स्थिति बन रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ भी इस मामले की सुनवाई कर रही है। 10 सितंबर को जारी आदेश में कोर्ट ने ई-रिक्शा के बढ़ते पंजीकरण पर चिंता जताई और परमिट से छूट को इनके अनियंत्रित होने की वजह माना।

 

इसके बाद परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा के पंजीकरण को रोकने के लिए 16 सितंबर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को पत्र भेजकर नियमन का अधिकार मांगा था। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उसके पास ई-रिक्शा का पंजीकरण रोकने या शहरों में इनकी संख्या तय करने का अधिकार नहीं है।

 

यह भी पढ़ें: जियाउल हक हत्याकांड: राजा भैया समेत 5 के खिलाफ केस बंद, अब आगे क्या?

हर 15 दिन में केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव

ई-रिक्शा को परमिट के दायरे में लाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया लंबी है। परिवहन मुख्यालय की ओर से गठित समिति ने भी परमिट अनिवार्य करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजने की सिफारिश की है।अब इस संबंध में जल्द ही केंद्र को पत्र भेजा जाएगा। अगर केंद्रीय मंत्रालय 2018 के ई-रिक्शा संबंधी आदेश को संशोधित करता है, तो इसका असर सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में ई-रिक्शा के संचालन और नियंत्रण की व्यवस्था बदल सकती है।


परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।

परमिट मिलने पर तय होगी ई-रिक्शा की संख्या

ई-रिक्शा परमिट के दायरे में आने के बाद क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आरटीए के अध्यक्ष मंडलायुक्त होते हैं और वह पूरे मंडल में परमिट जारी करते हैं। ई-रिक्शा को परमिट के दायरे में लाए जाने के बाद आरटीए यह तय करेगा कि संबंधित शहर में कुल कितने ई-रिक्शा संचालित होंगे। इसी आधार पर परमिट जारी किए जाएंगे।राजधानी में ऑटो-टेंपो के अनियंत्रित होने पर वर्ष 2008 में परमिट देने में सख्ती बरती गई थी। दोनों वाहनों को परमिट देने की संख्या भी तय कर दी गई थी। अब नया ऑटो-टेंपो तभी खरीदा जा सकता है, जब पुराने वाहन के खत्म होने का प्रमाणपत्र हो।इसी व्यवस्था की तर्ज पर ई-रिक्शा को भी परमिट के दायरे में लाने की तैयारी है।

परमिट से ही परिवहन वाहनों पर नियंत्रण

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का अध्याय पांच परिवहन वाहनों के नियंत्रण से संबंधित है। यह अध्याय मुख्य रूप से व्यावसायिक व परिवहन वाहनों, जैसे बस, ट्रक और टैक्सी आदि के सुगम, सुरक्षित और कानूनी संचालन के लिए बनाया गया है। इसके तहत धारा 66 से धारा 96 तक प्रावधान किए गए हैं। व्यावसायिक वाहनों के लिए परमिट लेना अनिवार्य है, लेकिन परमिट से छूट मिलने के कारण ई-रिक्शा पर फिलहाल इसी तरह का नियंत्रण नहीं है।

18 अक्टूबर 2018 के आदेश से मिली थी छूट

 केंद्रीय मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रियंक भारती ने 18 अक्टूबर 2018 को नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 2 के खंड ‘प’ में बैटरी चालित यान का उल्लेख किया गया था। इसी व्यवस्था के तहत बैटरी चालित वाहनों को परमिट से छूट दी गई थी। इसके अलावा मेथनॉल और इथेनॉल ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी परमिट लेने से छूट दी गई थी।

 

यह भी पढ़ें: वाराणसी में 30 लाख का इनामी नक्सली बृजेश गंजू एनकाउंटर में ढेर, UP ATS ने मारा

सरकार के सामने लंबी प्रक्रिया की चुनौती

मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया लंबी है। ई-रिक्शा को परमिट लेने से मिली छूट खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना होगा। परिवहन विभाग की समिति ने भी इस दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजने की सिफारिश की है।सरकार अब इस मामले में केंद्र को प्रस्ताव भेजने के साथ लगातार पैरवी करेगी। ⁠हर 15 दिन के अंतराल पर प्रस्ताव भेजकर ई-रिक्शा को परमिट व्यवस्था में लाने की मांग आगे बढ़ाई जाएगी। इससे ई-रिक्शा की संख्या और संचालन को निर्धारित सीमा के भीतर नियंत्रित करने का रास्ता खुल सकता है।


और पढ़ें