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पूर्व MLC शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ED की छापेमारी, करोड़ों की GST चोरी का आरोप

परिवर्तन निदेशालय ने सोमवार को करोड़ों की जीएसटी चोरी के मामले में बसपा के पूर्व एमएलसी शाहनवाज राणा सहित कई आरोपियों से जुड़े नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

money recovered in ed raid

ईडी के छापेमारी में बरामद नकदी , Photo Credit: Social Media

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त्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के साथ हरियाणा के फरीदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के मामले में ED ने पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा समेत कई आरोपियों से जुड़े नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान शाहनवाज राणा के मुजफ्फरनगर स्थित आवास और गाजियाबाद स्थित सुधा स्टील से करीब दो करोड़ रुपये नकद, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। देर शाम तक कई परिसरों में जांच जारी रही।

ED की टीम ने मुजफ्फरनगर में शाहनवाज राणा के आवास राणा हाउस के अलावा उनके चाचा और पूर्व विधायक व RLD नेता नूर सलीम राणा के आवास पर भी तलाशी ली। इसके साथ ही स्टील फैक्ट्री के मालिक संजय जैन के आवास, द्वारिकापुरी और नई मंडी स्थित पूर्व चेयरमैन अनिल तायल के परिसरों की भी जांच की गई। जांच का दायरा संबंधित कंपनी के मुख्य कार्यालय, एक रोलिंग मिल और शाहनवाज राणा के चार्टर्ड अकाउंटेंट तक भी पहुंचा। ED अधिकारियों ने कई ठिकानों से ऐसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए, जिनसे कथित फर्जी बिलिंग और आईटीसी के लेनदेन से जुड़े सुराग मिलने की बात कही जा रही है।

20 करोड़ की कथित टैक्स चोरी की जांच

ED की कार्रवाई शाहनवाज राणा और उनके बेटे से जुड़ी जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट लिमिटेड में कथित फर्जी आईटीसी क्लेम के मामले की जांच के तहत की गई है। आरोप है कि कंपनी ने वास्तविक माल की आवाजाही किए बिना फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया और उसे आगे दूसरी कंपनियों को पास किया।

 

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जांच में जीएसटी अधिकारियों के स्तर पर करीब 9.63 करोड़ रुपये का आईटीसी गलत तरीके से हासिल करने और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे पास करने की बात सामने आई थी। इस तरह कथित फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने का आरोप है।

फर्जी कंपनियों से सर्कुलर ट्रांजेक्शन का आरोप

जांच एजेंसी को आशंका है कि कथित नेटवर्क में कई फर्जी या अस्तित्वहीन कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के जरिये बड़े पैमाने पर सर्कुलर लेनदेन किए गए और रकम को अलग-अलग स्तरों पर घुमाकर उसकी लेयरिंग की गई। इसके बाद कथित तौर पर नकदी निकाली गई। ED अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन सी कंपनियां और कारोबारी शामिल थे। एजेंसी कथित अपराध से अर्जित रकम से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों की भी जानकारी जुटा रही है। जांच में संपत्तियों की पहचान होने पर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

 

ED की छापेमारी में स्टील कारोबार से जुड़े कई लोगों के ठिकाने जांच के दायरे में आने से स्थानीय कारोबारियों में हड़कंप है। एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि संबंधित कंपनी के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों के बीच किस तरह के बिल और लेनदेन हुए थे और उनमें वास्तविक माल की आवाजाही हुई थी या नहीं।

 

2024 में भी जीएसटी विभाग ने की थी कार्रवाई

शाहनवाज राणा के ठिकानों पर इससे पहले पांच दिसंबर 2024 को जीएसटी अधिकारियों ने छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से कथित अभद्रता के मामले में शाहनवाज राणा, पूर्व सांसद कादिर राणा के बेटे और उनकी दो बेटियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।इसके बाद पुलिस ने शाहनवाज राणा के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। जेल में रहने के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और जेलर को धमकाने के आरोप में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने उनकी हिस्ट्रीशीट भी खोली थी।

 

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BSP से निकाले गए थे शाहनवाज राणा

शाहनवाज राणा का राजनीतिक विवादों से भी पुराना नाता रहा है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद दिल्ली की लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले को लेकर बसपा ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों में अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाई। अब एक बार फिर ED की कार्रवाई में उनका नाम सामने आया है। फिलहाल एजेंसी की जांच बरामद नकदी, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। छापेमारी पूरी होने के बाद कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।


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