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फर्जी पुलिस चौकी का भंडाफोड़, AI से न्यूड फोटो बनाकर करते थे ब्लैकमेल

यूपी के मेरठ जिले में थाने से तीन किलोमीटर दूर पर एक फर्जी पुलिस चैकी बनाकर लोगों से ठगी करने वाले दो शातिर युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया है। पूछताछ के बाद अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। पढ़े रिपोर्ट

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पुलिस हिरासत में पकड़े गए आरोपी। Photo Credit: Social Media

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने पुलिस की वर्दी, फर्जी पुलिस चौकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दम पर लोगों से लाखों रुपये की उगाही का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने थाने से करीब तीन किलोमीटर दूर संचालित फर्जी पुलिस चौकी पर छापा मारकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि गिरोह सोशल मीडिया पर युवती बनकर लोगों को जाल में फंसाता, AI से उनकी फर्जी न्यूड तस्वीरें तैयार करता और फिर पुलिस कार्रवाई व बदनामी का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलता था। पुलिस अब फरार दो अन्य आरोपियों की तलाश के साथ बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है।

शिकायत से खुला हाईटेक ब्लैकमेलिंग रैकेट

एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले के मुताबिक 29 जुलाई को नीरज नाम के युवक ने ब्रह्मपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि खुद को पुलिसकर्मी बताने वाले कुछ लोग झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर उससे रुपये मांग रहे हैं। शिकायत में जिस पुलिस चौकी का जिक्र था, उसकी जांच की गई तो पता चला कि पुलिस रिकॉर्ड में ऐसी कोई चौकी है ही नहीं। इसके बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की और पूरे गिरोह का खुलासा हो गया।

पुलिस को जांच के दौरान टीपी नगर क्षेत्र में एक संदिग्ध ठिकाने की जानकारी मिली। शुक्रवार देर रात छापेमारी की गई तो कमरे के अंदर चौकी प्रभारी की टेबल-कुर्सी, पुलिस जैसी व्यवस्था, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें, पुलिस की वर्दी, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद हुआ। कमरे को इस तरह तैयार किया गया था कि वहां पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति उसे असली पुलिस चौकी समझे।

 

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AI से बनाते थे फर्जी न्यूड फोटो

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि गिरोह पहले सोशल मीडिया पर युवती बनकर लोगों से दोस्ती करता था। अश्लील बातचीत के दौरान पीड़ितों की तस्वीरें हासिल की जाती थीं। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी फर्जी अश्लील तस्वीरें तैयार की जाती थीं। इन तस्वीरों को वायरल करने और पुलिस केस दर्ज कराने की धमकी देकर पीड़ितों को ब्लैकमेल किया जाता था।

 

आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी पुलिस चौकी बुलाते थे। वहां पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी और बदनामी का डर दिखाकर समझौते के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते थे। पुलिस का मानना है कि इस तरीके से कई लोगों को अपना शिकार बनाया गया है।

पहले प्रॉपर्टी डीलिंग, फिर शुरू किया ब्लैकमेलिंग का धंधा

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे। आर्थिक नुकसान होने के बाद उन्होंने हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग को कमाई का जरिया बना लिया। जो लोग रुपये देने से इनकार करते थे, उन्हें झूठे मुकदमे, गिरफ्तारी और मीडिया में बदनाम करने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता था।

 

मुख्य आरोपी राहुल पाल पुलिसकर्मियों के साथ फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर रील पोस्ट करता था, ताकि लोगों के बीच उसकी पहचान एक प्रभावशाली पुलिसकर्मी जैसी बन सके। पुलिस अब इन रीलों की भी जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी का किन-किन पुलिसकर्मियों से संपर्क था और कहीं किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं थी।

दो गिरफ्तार, फरार आरोपियों की तलाश

पुलिस ने इस मामले में राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, लैपटॉप और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोगों को ब्लैकमेल कर कितनी रकम वसूली गई।

 

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AI के दुरुपयोग का बड़ा मामला

पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग का नहीं, बल्कि AI तकनीक के दुरुपयोग का भी गंभीर उदाहरण है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। यदि गिरोह के तार अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े मिले तो जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी या तस्वीरें साझा करने से बचें और इस तरह की किसी भी ब्लैकमेलिंग की शिकायत तत्काल पुलिस से करें।


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