दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच बढ़ते जल संकट को देखते हुए हरियाणा सरकार ने राजधानी को राहत देने का भरोसा दिया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बातचीत के दौरान आश्वासन दिया कि मूनक नहर के जरिए दिल्ली को प्रतिदिन कम से कम 1000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यमुना नदी के घटते जलस्तर के कारण राजधानी के कई इलाकों में जलापूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
शनिवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिल्ली में कच्चे पानी की उपलब्धता, जल शोधन संयंत्रों की उत्पादन क्षमता, टैंकरों की तैनाती और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जल संकट के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो और पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।
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यमुना का जलस्तर गिरने से बढ़ा संकट
अधिकारियों के मुताबिक, वजीराबाद बैराज में यमुना का जलस्तर सामान्य 674.5 फीट से घटकर करीब 668 फीट तक पहुंच गया है। इसके कारण जल शोधन संयंत्रों को पर्याप्त कच्चा पानी नहीं मिल पा रहा है। बताया गया कि इससे दिल्ली में रोजाना 80 से 100 मिलियन गैलन पानी के उत्पादन पर असर पड़ा है। गर्मियों में दिल्ली को करीब 1250 मिलियन गैलन पानी की आवश्यकता होती है, जबकि मौजूदा हालात में उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
जल संकट से निपटने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने 980 से अधिक टैंकर मैदान में उतारे हैं। ये टैंकर प्रतिदिन 6000 से ज्यादा चक्कर लगाकर प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचा रहे हैं। संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में छोटे टैंकरों की भी व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन पंपिंग और वैकल्पिक जल स्रोतों की मदद से करीब 900 मिलियन गैलन प्रतिदिन पानी की आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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भविष्य के लिए भी तैयार हो रही सरकार
दिल्ली सरकार ने जल संकट के स्थायी समाधान के लिए कई योजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इनमें हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की संभावना, नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, अतिरिक्त बोरवेल और बड़े स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाएं शामिल हैं।
सरकार ने अधिकारियों को पानी की बर्बादी रोकने, लीकेज पर नियंत्रण करने और शिकायतों के त्वरित निपटारे के निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि हालात पर रोजाना नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे ताकि दिल्लीवासियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।