logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बिजली कर्मियों की हड़ताल से हरियाणा में ब्लैकआउट, दो दिन राहत के आसार नहीं

बिजली गुल होने से दैनिक कार्य हो रहे प्रभावित। लोग जैनरेटर किराये पर लाने लगे। आम नागरिकों को ज्यादा परेशानी। सरकार ने की हड़ताल खत्म करने की अपील। बिजली निगम अधिकारियों ने नंबर किए बंद।

Haryana News

प्रदर्शन करते बिजली निगम कर्मचारी। (Photo Credit: khabargaon)

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

हरियाणा में बिजली निगम कर्मियों हड़ताल पर जाने से पूरे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। लगभग 15 जिलों में बुधवार रात 10 बजे के बाद से ही ब्लैकआउट हो गया। अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, पानीपत, रोहतक, जींद, हिसार, हांसी, महेंद्रगढ़, झज्जर और फरीदाबाद में स्थिति ज्यादा खराब है।

 

बिजली बंद होने से घरों में इन्वर्टर बैटरी तक जवाब दे चुके हैं। हालांकि कुछ लोगों ने जैनरेटर किराये पर मंगवा लिए हैं, लेकिन मीडिल क्लास वर्ग को इससे सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। बिजली बंद होने से पानी की भी किल्लत हो रही है। जिस वजह से बिजली पानी से होने वाले दैनिक कार्यों को करने में भी लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

 

हालात ये हैं कि लोग मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं कर पा रहे। फ्रिज में रखा दूध, सब्जियां और खाना खराब होने का डर सता रहा है। इधर, भिवानी के कासनी खुर्द गांव में खेत की बिजली लाइन को सिंगल फेज से थ्री फेज में बदलने के प्रयास के दौरान 50 साल के बलवान को करंट लग गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

 

बिजली निगम कर्मचारियों ने आमजन से अपील की है कि वह बिजली की लाइनों को टच मत करें। हालांकि बिजली निगम कर्मचारियों की तरफ से 24 अक्टूबर तक हड़ताल जारी रखने की घोषण की है, लेकिन सरकार लगातार कर्मचारियों को त्योहारी दिनों का हवाला देते हुए हड़ताल खत्म करने का आग्रह कर रही है। अगर हड़ताल इसी तरह जारी रहती है तो इससे बिजली निगम के साथ-साथ उद्यौग जगत को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। फिलहाल हड़ताल खत्म करने को लेकर किसी प्रकार का बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अभी और दो दिन राहत के आसार नहीं है।

लोगों ने लगाया जाम

बता दें कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी को सौंपने के फैसले का हरियाणा में बिजली निगम कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। बुधवार को विरोध के चलते बिजली निगम कर्मचारियों ने फैसले की प्रतिलिपियां भी जलाई थी। उसके बाद रात 10 बजे कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे।

 

कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से कई इलाकों में अभी तक बिजली गुल है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिक को उठानी पड़ रही है। बिजली सप्लाई बहाली की मांग को लेकर गुरूवार को फरीदाबाद और करनाल में लोगों ने जाम लगा दिया। उसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

 

यह भी पढ़ें: झगड़े में भाई का साथ नहीं दिया, भाइयों ने मिलकर इकलौते बेटे को मार डाला

जारी नंबर पर नहीं हो रहा कॉल रिसीव

बता दें और हड़ताल से पहले ही बिजली अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई थी। जिलों में प्रशासन की तरफ से कुछ टोल-फ्री व अधिकारियों के सरकारी नंबर जारी किए। जिसके साथ एक संदेश लिखा कि हड़ताल के दौरान बिजली संबंधी शिकायतों के लिए नागरिक इन नंबरों पर संपर्क करें। हालात ये हैं कि लोगों ने इन नंबरों पर फोन किया तो नंबर या तो रेंज से बाहर है, या बिजी बता रहा है। जिन नंबरों पर रिंग जा रही है, उस पर कोई अधिकारी या कर्मचारी कॉली रिसीव नहीं कर रहा है।

 

यह भी पढ़ें: पुलिस की कस्टडी से भागे आरोपी, पुलिया से लगाई छलांग, अस्पताल पहुंचे

कोई मनाने में जुटा तो किसी ने किया हड़तल का समर्थन

बिजली निगम कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए सीएम नायब सिंह सैनी ने बिजलीकर्मियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बातचीत के रास्ते खुले हैं। वहीं हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने भी कहा कि सरकार की तरफ से सारा इंतजाम किया हुआ है। यह जो हड़ताल की जा रही है, वो बेवजह है। हरियाणा बिजली विनियामक आयोग ने आदेश दिया है कि निजी कंपनी को बिजली दी जाए। हालांकि विनियामक के सामने हमने बड़ा वकील खड़ा करके और विभाग ने पूरी ताकत से उस कंपनी का विरोध किया है। मगर यह स्वायत्त संस्था है, हमने बिजली निजीकरण के लिए कोई आवेदन नहीं मांगा था, लेकिन यह केंद्रीय एक्ट है जिसमें यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति, कोई भी कंपनी आवेदन लगा सकती है कि हमें बिजली दी जाए।

 

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि कर्मचारियों साथियों से वह कहना चाहते हैं कि हड़ताल का रास्ता छोड़कर वह हमारे साथ आए और केस तैयार कराने के लिए यदि हमारे वकील को कोई राय देना चाहते हैं तो वह दे या वो अपना वकील खड़ा करना चाहते है तो वह खड़ा करे या वो कोई और वकील का सुझाव देना चाहते है तो बताए, हम वह वकील हायर कर लेंगे। 


विधायक जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि संबंधित कंपनी का गठन महज एक साल पहले हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जिस कंपनी के पास बिजली वितरण के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव नहीं है और जिसके आवश्यक संसाधनों, रखरखाव की क्षमता तथा आर्थिक सामर्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना पर्ची, बिना खर्ची का दावा करने वाली बीजेपी सरकार को इस फैसले की पूरी प्रक्रिया जनता के सामने रखनी चाहिए।


इनेलो के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व गृह मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा कि सरकार चाहे तो हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले को खत्म करवा सकती है। इसके लिए सरकार को आगे अपील करने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। वर्ष 2003 के एक्ट के तहत सरकार जनहित के मुद्दे पर आयोग को लिखित निर्देश दे सकती है। संपत सिंह ने कहा कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज चाहें तो वह इस मुद्दे पर बिजली कर्मचारियों की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि फैसले के खिलाफ आगे अपील करने की बात करना महज दिखावा है।


सर्वजातीय कंडेला खाप के प्रधान ओमप्रकाश कंडेला, पेस प्रवक्ता जगत सिंह रेढू और प्रधान महासचिव राजसिंह कण्डेला ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आम आदमी के हकों पर डांका डाल रही है। हरियाणा सोलर एसोसिएशन ने भी हड़ताल का समर्थन किया।

Related Topic:#haryana news

और पढ़ें