राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ‘A’ ग्रेड, 100 में से 88.5 अंक
राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ग्रेड ए हासिल हुआ है। कई मामलों में उसे पूरे अंक मिले हैं, जिसके चलते उसे कुल 100 में से 88.5 नंबर मिले हैं।

हरियाणा को मिला ग्रेड A, Photo Credit: Social Media
बिजली सप्लाई और रेलुगेशन के मामले में राज्यों की बतानी वाली राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ग्रेड ए हासिल हुआ है। उसे 100 में से 88.5 अंक मिले हैं और वह 8वें नंबर पर है। यह रिपोर्ट पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) और REC लिमिटेड के सहयोग से जारी की गई है। इस उपलब्धि के साथ हरियाणा देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा को राष्ट्रीय स्तर पर 8वां स्थान मिला है और इसे ‘ए’ श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अग्रणी हैं। राज्यों का मूल्यांकन पांच प्रमुख मानकों- बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एनर्जी ट्रांजिशन और और नियामक शासन के आधार पर किया गया है।
हरियाणा को किसमें मिले पूरे नंबर?
‘बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता (संसाधन पर्याप्तता)’ श्रेणी में हरियाणा को 32 में से पूरे 32 अंक मिले। राज्य ने संसाधन पर्याप्तता संबंधी विनियम अधिसूचित किए हैं, बिजली खरीद के लिए योजना आरक्षित मार्जिन निर्धारित किया है और दीर्घकालिक योजना के लिए समय-सीमा तय की है। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी (STU) और डिस्कॉम के तीन-वर्षीय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है और अनुपालन न होने की स्थिति में दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं।
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नियामक शासन के क्षेत्र में भी हरियाणा को पूरे 5 में से 5 अंक प्राप्त हुए। अधिकारियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं और स्वीकृत पदों को समूह–ए, बी, सी और डी में विभाजित किया गया है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती सुनिश्चित हुई है।
डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति मजबूत
‘डिस्कॉम की वित्तीय सेहत’ में हरियाणा को 25 में से 23.5 अंक मिले। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैरिफ आदेश समय पर जारी किए गए और वित्त वर्ष 2023-24 का ट्रू-अप भी निर्धारित समय में पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि पिछले ट्रू-अप तक कोई नियामकीय परिसंपत्ति (रेगुलेटरी एसेट) सृजित नहीं की गई, जो वित्तीय अनुशासन का संकेत है। राज्य में ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन अधिभार (FPPAS) की मासिक व्यवस्था लागू है, जिसमें लागत का स्वतः समायोजन किया जाता है। इससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को बल मिला है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और एनर्जी ट्राजिशन में प्रगति
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस श्रेणी में हरियाणा को 23 में से 16 अंक प्राप्त हुए। नए बिजली कनेक्शन के लिए समय-सीमा निर्धारित है- मेट्रो क्षेत्र में 3 दिन, नगर पालिका क्षेत्र में 7 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 15 दिन। देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान है। मीटर परीक्षण एवं प्रतिस्थापन की समय-सीमा तय है और नेट मीटरिंग कनेक्शन 10 दिनों में जारी किए जाते हैं। एनर्जी ट्रांजिशन के क्षेत्र में हरियाणा को 15 में से 12 अंक मिले। 100 किलोवाट तक ग्रीन एनर्जी ओपन ऐक्सेस की व्यवस्था लागू है। ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अडिशनल सरचार्ज में छूट दी गई है।
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रीन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) की रूपरेखा वित्त वर्ष 2029-30 तक निर्धारित की गई है और कमी होने पर दंड का प्रावधान भी है। कुल मिलाकर, मजबूत नियामक ढांचा, वित्तीय अनुशासन और ऊर्जा क्षेत्र में सुधारात्मक कदमों के कारण हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है और बिजली क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।
HERC के अध्यक्ष ने क्या कहा?
इस बारे में हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने कहा है, 'राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ‘ए’ ग्रेड प्राप्त होना राज्य सरकार, आयोग और विद्युत उपयोगिताओं की पारदर्शी विनियमन व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता-केन्द्रित सुधारों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। 100 में से 88.5 अंक मिलना यह बताता है कि हमारा विनियामक ढांचा सुदृढ़, दूरदर्शी और राष्ट्रीय विद्युत क्षेत्र सुधारों के अनुरूप है। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और विनियामक शासन में पूर्ण अंक मिलना संसाधन पर्याप्तता की सुविचारित योजना, समयबद्ध टैरिफ आदेश और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार डाले बिना कठोर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की हमारी प्राथमिकता को रेखांकित करता है।'
उन्होंने आगे कहा है, 'आयोग राज्य के प्रत्येक उपभोक्ता को किफायती, विश्वसनीय और सतत विद्युत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हम वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को और सुदृढ़ करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, हरित मुक्त अभिगम को सुगम बनाने और बिजली के क्षेत्र में व्यवसाय सुगमता को और बेहतर करने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। हमारा उद्देश्य केवल उच्च रैंक प्राप्त करना नहीं बल्कि हरियाणा में पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य के अनुरूप विद्युत तंत्र का निर्माण करना है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति और उपभोक्ता कल्याण को सशक्त आधार प्रदान करे।'
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