हरियाणा में लव मैरिज हमेशा से एक मुद्दा रहा है। राज्य की एक पंचायत ने एक ऐसा फरमान जारी किया है जिसने लोगों के लिए इसे बहस का मुद्दा बना दिया है। मामला हिसार जिले के आर्य नगर गांव का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां की सामाजिक पंचायत ने हाल ही में लव मैरिज के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि गांव के अंतर्गत लव मैरिज करने वाले जोड़ों और उनका समर्थन करने वाले लोगों का पूरा गांव एक साथ मिलकर बहिष्कार करेगा।
गांव के लोगों ने बताया कि एक ही गांव में शादी की यह नई प्रथा पुरानी सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ है। इसलिए पूरे गांव ने एकजुट होकर इस रीति के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया है।
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बैठक में लिया गया फैसला
जानकारी के मुताबिक 20 सितंबर यानी रविवार को हुई इस बैठक में लगभग 1000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। गांव वालों के मुताबिक हाल के महीनों में गांव के जोड़ों के बीच ऐसी शादी के 3 मामले सामने आए थे। इसके बाद एक बड़ी पंचायत बुलाई गई।
बैठक में शामिल पंचायत के अध्यक्ष कुलवंत गोसला ने कहा कि गांव की हर लड़की को सभी अपनी बेटी मानते हैं। इसीलिए एक ही गांव में शादी की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक कमेटी के सदस्य लोगों के घर-घर जा कर यह भी सुनिश्चित करेंगे कि यह फैसला ठीक से लागू हो पाया है कि नहीं।
पंचायत ने बनाई दूरी
ऐसा नहीं है कि बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस फैसले को मंजूरी दी है या इस फैसले के साथ है। बैठक में मौजूद रहने के बावजूद आर्य नगर के सरपंच रतन सिंह ने इस विवादित फैसले से ग्राम पंचायत को पूरी तरह से अलग बताया। सरपंच ने साफ किया कि इस फैसले में पंचायत की कोई भूमिका नहीं है। यह केवल एक सामाजिक स्तर पर लिया गया फैसला है।
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पुलिस ने दिया भरोसा
इस बीच हिसार के SP सिद्धांत जैन ने मामले की जांच करने की बात कही है। उन्होंने भरोसा दिया है कि कानून का पालन करने वाले ऐसे सभी बालिग जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। वहीं संविधान में नागरिकों को अनुच्छेद 21 के तहत अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार है।
कोर्ट हो या प्रशासन सबने यह स्पष्ट किया है कि पंचायतों के ऐसे बहिष्कार वाले फरमानों की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। इस तरह के आयोजनों से जुड़े लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत डराने-धमकाने और आपराधिक मामलों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।