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2019 के बाद हरियाणा में पहली बार बढ़ा लिंगानुपात, इसके पीछे क्या कारण रहे?

हरियाणा में पिछले पांच सालों में पहली बार लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है। पंचकूला जिले में सबसे अच्छा लिंगानुपात रहा। लिंगानुपात में सुधार के लिए सरकार ने कई कदम उठाए थे।

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नायब सिंह सैनी ,Photo Credit: PTI

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म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं? हरियाणा की पहलवान बेटियों पर बनी फिल्म दंगल का यह डायलॉग हर किसी को याद है। इस डायलॉग से हरियाणा की बेटियों की खेलों में भूमिका को दिखाया गया था लेकिन इंटरनेशनल मंचों पर देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा की बेटियों के अपने राज्य में ही लिंगानुपात लंबे समय से एक ऐसी समस्या बन गया है, जिसका हल नहीं निकल पा रहा है। हालांकि, अब हरियाणा की बेटियों की संख्या को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। साल 2025 में हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 923 दर्ज किया गया जो पिछले पांच सालों में सबसे बेहतरीन है। 

 

2014 के मुकाबले 2025 में लिंगानुपात में सुधार हुआ है और 13 अंकों की बड़ी बढ़ोतरी लिंगानुपात में दर्ज की गई है। हरियाणा सरकार के डेटा के अनुसार, साल 2025 में हरियाणा में कुल 5,19,691 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 2,70,281 लड़के और 2,49,410 लड़कियां शामिल हैं। इस तरह हर एक हजार लड़कों पर 923 लड़कियों का जन्म हुआ है। 2024 में लिंगानुपात 910 था। अधिकारियों का कहना है कि लिंगानुपात में सुधार उनकी सख्ती के कारण हुआ है। 

 

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पांच साल में सबसे बेहतर लिंगानुपात

2019 से 2025 तक के डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2025 में लिंगानुपात सबसे बेहतरीन रहा है। 

  • 2019- 923
  • 2020-922
  • 2021- 914
  • 2022-917
  • 2023- 916
  • 2024- 910
  • 2025- 923

पंचकूला में सबसे अच्छा लिंगानुपात

2025 के आंकड़ों के अनुसार, पंचकूला में राज्य का सबसे ज्यादा लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 971 महिलाएं का दर्ज किया गया है। पिछले साल की रिपोर्ट में पंचकूला का लिंगानुपात 915 था और सिर्फ एक साल में ही पंचकूला ने 56 अंकों की बढ़ोतरी की है। पंचकूला के अलावा फतेहाबाद में 961 और पानीपत में 951 लिंगानुपात दर्ज किया गया है। इनके अलावा अंबाला में 926, भिवानी में 926, हिसार में 926, कैथल में 924, करनाल 944स कुरुक्षेत्र 927, मेवात 935, सिरसा 937 और यमुनानगर में 943 लिंगानुपात रिकॉर्ड किया गया। 

लिंगानुपात सुधरने के पीछे कारण

हरियाणा में खराब लिंगानुपात लंबे समय से एक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर जमकर राजनीतिक बयानबाजी भी होती रही है। हालांकि, हालिया सुधारों के बाद अधिकारियों ने बताया कि 2024 में लिंगानुपात में गिरावट के बाद एक टास्क फोर्स का गठन किया गया, जिसने स्वास्थ्य, आयुष, महिला एवं बाल विकास और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन विभागों के अधिकारियों के साथ हर हफ्ते समीक्षा बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि लिंग-चयनित गर्भपात और MTP किट की बिक्री से संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई।


हरियाणा में टास्क फोर्स ने 395 MTP सेंटर बंद कराए। अधिकारियों ने बताया कि MTP अधिनियम के तहत कुल 114 FIR दर्ज की गईं, जिनमें से 83 मामलों में अदालतों में चार्जशीट दायर की गईं। उन्होंने बताया कि 2025 में प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PC-PNDT) एक्ट के उल्लंघन के लिए 154 छापे मारे गए, 41 केमिस्ट की दुकानें सील की गईं, जबकि उल्लंघन के लिए 395 MTP सेंटर बंद कर दिए गए।

 

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अवैध गर्भपात को रोका

खराब लिंगानुपात का एक बड़ा कारण अवैध गर्भपात को भी माना जाता रहा है। अवैध गर्भपात को रोकने के लिए सरकार ने रिवर्स ट्रैकिंग में को तेज किया। रिवर्स ट्रैकिंग यानी ऐसी 12 हफ्ते की गर्भवती महिला जिसका पहला बच्चा एक लड़की हो। ऐसी महिलाओं के गर्भ पर नजर रखी जाती थी। 2025 में सरकार ने रिवर्स ट्रैंकिंग पर खास फोकस किया। अवैध गर्भपात को रोकने के लिए सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए प्रेगनेंट महिलाओं और उनके बच्चों का रिकॉर्ड रखा। जिन आंगनवाड़ियों में लड़के ज्यादा और लड़कियां कम पैदा हुई उन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के काम की जांच की गई और उन्हें नोटिस दिए गए। इश तरह सरकार ने हर प्रेगनेंट महिला पर नजर रखी, जिससे अवैध गर्भपात को रोकने में आसानी हुई। 

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