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हिमाचल सरकार अब मलबे से करेगी कमाई, सीएम सुक्खू ने केंद्र को क्या प्लान बताया?

हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की।

Sukhvinder Singh Sukhu met Bhupender Yadav

केंद्रीय मंत्री से मिले हिमाचल के सीएम, Photo Credit: CMO Himachal

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हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और फ्लैश फ्लड का खतरा कम करने के लिए अब नदियों में जमा मलबे, बोल्डर और रेत को वैज्ञानिक तरीके से हटाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेग केजिं लिए स्पष्ट और सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

 

इस मुलाकात को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, पत्थर, बोल्डर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदी की जल वहन क्षमता घटती है और बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचों पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

 

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वैज्ञानिक ड्रेजिंग पर दिया जोर

सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आपदा जोखिम कम करने के लिए संवेदनशील नदी क्षेत्रों में समयबद्ध और वैज्ञानिक ड्रेजिंग जरूरी है। इसके लिए वन सलाहकार समिति के निर्णयों एवं सिफारिशों के आधार पर स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि ड्रेजिंग से जुड़े प्रस्ताव अनावश्यक देरी के बिना निपट सकें।

 

सुक्खू ने पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद नदी चैनल से मलबा हटाने का उद्देश्य खनन नहीं, बल्कि नदी की जल वहन क्षमता बहाल करना, प्रवाह में अवरोध हटाना और मानव जीवन व सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना है। मुख्यमंत्री ने ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का आग्रह करते हुए कहा कि इन कार्यों में वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग के लिए डायवर्जन नहीं किया जाता।

वैज्ञानिक सर्वे के बाद ही होगी ड्रेजिंग

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग मनमाने तरीके से नहीं होगी। इसके लिए वैज्ञानिक आकलन, रीप्लेनिशमेंट स्टडी और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान तैयार किए जाएंगे। हटाए जाने वाले मलबे की मात्रा और ड्रेजिंग क्षेत्र का निर्धारण वैज्ञानिक मानकों से होगा। ड्रेजिंग कार्य केवल गैर-मानसून अवधि में पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए किए जाएंगे। जरूरत के अनुसार इन्हें संबंधित वन एवं नदी प्रबंधन योजनाओं में भी शामिल किया जाएगा।

 

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मलबे से राजस्व कमाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने ड्रेजिंग से निकली सामग्री के सुरक्षित, नियंत्रित उपयोग और निस्तारण की व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सामग्री के विनियमित उपयोग से मिलने वाले शुद्ध राजस्व को सतत विकास और वन संबंधी गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि हिमाचल में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के साथ हिमाचल की व्यावहारिक जरूरतों और हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा। इस बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, प्रधान सचिव (वन) एम. सुधा और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर मौजूद रहे।


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