logo

मूड

ट्रेंडिंग:

PMK-TVK की नजदीकी से तमिलनाडु में बीजेपी के समीकरण कितने बदलेंगे?

तमिलनाडु में नए राजनीतिक समीकरण की सुगबुगाहट सुनाई दे रही हैं। बीजेपी और एनडीए गठबंधन की साथी PMK और TVK की नजदीकियां बढ़ने की खबर आ रही है।

Tamil Nadu CM Vijay

तमिलनाडु के सीएम विजय, Photo Credit- Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और डॉ. अनबुमणि रामदास के नेतृत्व वाली पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के बीच बातचीत की खबरें चल रही हैं। यह नया घटनाक्रम राज्य की राजनीति विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के भविष्य को लेकर कई नए सवाल खड़े कर रहा है।

 

तमिलनाडु में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 में से 108 सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। विजय 10 सीटों से बहुमत से पीछे रह गए थे जिसे उन्होंने छोटी पार्टियों के सहयोग से पूरा करके सरकार बनाई। अब राज्य में मदुरंतकम और धरापुरम सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इन उपचुनावों से ठीक पहले PMK ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया। PMK ने मदुरंतकम उपचुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन को समर्थन न देने का ऐलान किया है। इस वजह से यह बात और ज्यादा चर्चा में हैं कि क्या PMK, बीजेपी से अलग हो रही है और अगर हां तो इससे राज्य में क्या बदलेगा। आइए समझते हैं-

 

यह भी पढ़ें: 'अखिलेश ने तलाक दे दिया, मैंने कबूल कर लिया', सपा के साथ जाने पर बोले OP राजभर

 

मदुरंतकम में वन्नियार समुदाय की आबादी अच्छी-खासी है। आमतौर पर PMK का समर्थन AIADMK-BJP गठबंधन को फायदा पहुंचाता था लेकिन इस बार PMK के तटस्थ रहने से विजय की पार्टी TVK को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अनबुमणि रामदास और जॉन अरोकीआसामी, जो कि विजय के राजनीतिक सलाहकार  भी है,  के बीच चर्चा चल रही है। बात केवल चुनावी समर्थन तक सीमित नहीं है बल्कि भविष्य में TVK सरकार के कैबिनेट में PMK को शामिल करने तक पहुंच चुकी है।

TVK के लिए PMK इतनी जरूरी क्यों है?

TVK के लिए PMK को अपने साथ जोड़ना सिर्फ एक छोटा-मोटा चुनावी समझौता नहीं है बल्कि अपनी सरकार को स्थायित्व देने का एक तरीका है। PMK का सबसे बड़ा आधार उत्तरी तमिलनाडु में फैला वन्नियार समुदाय है। वन्नियार समुदाय का राज्य के कई इलाकों में मजबूत कैडर और प्रभाव है। फिलहाल विधानसभा में PMK के पास 4 विधायक हैं। यदि PMK के विधायक TVK के साथ आते हैं तो विजय की सरकार बिना किसी समस्या के मजबूत स्थिति में आ जाएगी।

BJP के समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा?

PMK लंबे समय से एनडीए की सहयोगी रही है। PMK ने 1998, 2014, 2019, 2021 और हालिया 2026 का चुनाव भी AIADMK-BJP गठबंधन के साथ ही लड़ा था। अगर PMK, TVK में चली जाती है तो उत्तरी तमिलनाडु में एनडीए का वोट बैंक काफी कमजोर पड़ जाएगा। साथ ही बीजेपी तमिलनाडु में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। PMK का एनडीए छोड़कर विजय की पार्टी के साथ जाना विपक्ष की एकता को तोड़ देगा। इससे बीजेपी को वन्नियार बहुल सीटों पर दोबारा नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी पड़ेगी। बीजेपी की तमिलनाडु रणनीति में छोटे और प्रभाव वाले क्षेत्रीय दलों को साथ रखकर एनडीए का दायरा बढ़ाना शामिल रहा है। PMK के बाहर निकलने से राज्य में बीजेपी के पास एक बड़ा क्षेत्रीय साझेदार कम हो जाएगा।

TVK के लिए राह आसान नहीं

हालांकि PMK के आने से विजय को मजबूती मिलेगी लेकिन इससे उनके मौजूदा सहयोगियों के साथ तनाव हो सकता है। VCK का मुख्य आधार दलित समुदाय है, जबकि PMK का मुख्य आधार वन्नियार समुदाय है। तमिलनाडु में इन दोनों समुदायों के बीच कई सामाजिक और जातीय विवाद रहे हैं। VCK पहले से विजय सरकार में शामिल है और उसके पास कैबिनेट पद भी है। दोनों के बीच में तालमेल बैठाना विजय के लिए चुनौती होगी। CPI और CPI-M ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे TVK गठबंधन से दूरी बना रहे हैं और उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रहे हैं। PMK की एंट्री के बाद यह दूरी और बढ़ सकती है।

 

यह भी पढ़ें: कुल्लू में अवैध भांग की खेती पर शिकंजा, नष्ट किए गए 13,543 पौधे

तमिलनाडु में आरक्षण का इतिहास

तमिलनाडु में समुदायों का राजनीति में प्रभाव बहुत गहरा रहा है। राज्य में 69% आरक्षण मॉडल लागू है। इसे 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करवाकर 50% की कानूनी सीमा से सुरक्षा दिलवाई थी। वन्नियार समुदाय 20% MBC (अति पिछड़ा वर्ग) कोटे में आता है। 2021 में चुनाव से ठीक पहले AIADMK सरकार ने वन्नियारों को 20% MBC में से 10.5% का अंदरूनी आरक्षण दिया था। हालांकि, मार्च 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने पर्याप्त डेटा न होने के कारण इसे रद्द कर दिया था। PMK अब भी जातिगत जनगणना करवाकर इस 10.5% आंतरिक आरक्षण को बहाल करने की मांग कर रही है।

 

तमिलनाडु की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। अगर PMK औपचारिक रूप से TVK के साथ हाथ मिलाती है तो इससे न केवल विजय की सरकार कानूनी और संख्या बल से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी, बल्कि बीजेपी को उत्तरी तमिलनाडु में अपने राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से लिखना पड़ेगा। अब सभी की नजरें मदुरंतकम और धरापुरम उपचुनाव के नतीजों पर टिकी हैं जो इस नए राजनीतिक गठबंधन की अंतिम दिशा तय करेंगे।


और पढ़ें