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'नीतीश, मांझी और नितिन नवीन के पास कैसे है घर?' RJD ने सम्राट चौधरी से पूछे सवाल

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। इस नोटिस पर अब राज्य में जमकर राजनीति हो रही है।

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राबड़ी देवी । Photo Credit: PTI

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बिहार की राजनीति में सरकारी आवासों को लेकर घमासान तेज हो गया है। राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सोमवार को RJD प्रदेश कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए सरकारी आवासों के आवंटन में पक्षपात, दोहरे मापदंड और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया।


सिद्दीकी ने कहा कि देश के सबसे गरीब राज्यों में शुमार बिहार के मुख्यमंत्री का आवास देश के सबसे भव्य और विस्तारित सरकारी परिसरों में शामिल हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास का विस्तार कर उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित 5, देशरत्न मार्ग को भी उसमें मिला लिया गया है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि नियमों की दुहाई दी जा रही है तो उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को उनके लिए निर्धारित आवासों में क्यों नहीं भेजा जा रहा है।

 

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राबड़ी देवी के साथ अलग व्यवहार क्यों?

RJD नेता ने आरोप लगाया कि बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के साथ राजनीतिक द्वेष की भावना से व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कई सांसद, पूर्व मंत्री, आयोगों के अध्यक्ष और सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं को सरकारी आवास उपलब्ध हैं, तब केवल राबड़ी देवी को नोटिस देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

सम्राट चौधरी से पूछे जा रहे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में RJD ने मुख्यमंत्री के सामने एक दर्जन से अधिक सवाल रखे। इनमें प्रमुख रूप से पूछा गया कि उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित 5, देशरत्न मार्ग को मुख्यमंत्री आवास में किस नियम के तहत शामिल किया गया? मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक सेवक आवास करने के पीछे क्या उद्देश्य था? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई नेताओं और सांसदों को किस आधार पर सरकारी बंगले आवंटित किए गए हैं?  पटना में सांसदों को बंगले आवंटित करने का नियम क्या है, जबकि उन्हें दिल्ली में भी सरकारी आवास प्राप्त हैं? पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार को पटना व दिल्ली दोनों जगह आवास किस हैसियत से मिले हैं? यदि राबड़ी देवी को नया आवास आवंटित किया जाता है, तो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को अलग आवास क्यों नहीं दिया जा सकता,

 

RJD नेताओं से कभी नहीं खाली कराया गया था आवास। 

 

सिद्दीकी ने दावा किया कि महागठबंधन सरकार के दौरान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद बीजेपी नेताओं के सरकारी आवास नहीं छीने गए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पास भवन निर्माण विभाग होने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के आवास खाली कराने की कार्रवाई नहीं की गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इसी तरह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करती रही, तो RJD के नेता अपने सरकारी आवास और सुरक्षा तक वापस करने पर विचार कर सकते हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए हाईकोर्ट की गाइडलाइन के सवाल

RJD प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि दिल्ली में आवास आवंटन के स्पष्ट मानक हैं, लेकिन बिहार में उन्हीं सिद्धांतों का पालन नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में तय दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है। मंडल ने कहा कि राबड़ी देवी के नाम 10, सर्कुलर रोड का आवास वर्ष 2006 से आवंटित है, लेकिन अब उन्हें अपमानित करने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से नोटिस भेजा जा रहा है।

 

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सरकार दलित कार्ड खेल रही है

RJD की अनुसूचित जाति और जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचन्द्र राम ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आवास विवाद को दलित बनाम गैर-दलित का रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि वास्तव में दलितों की हितैषी है तो राज्य के गरीब और बेघर दलित परिवारों के लिए आवास की व्यवस्था करे। शिवचन्द्र राम ने कहा कि बिहार में गरीबों और दलितों के घर तोड़े जा रहे हैं, जबकि सत्ता से जुड़े लोगों को बड़े-बड़े सरकारी बंगले उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट होती हैं।

राजनीतिक लड़ाई का नया मोर्चा

राबड़ी आवास विवाद अब केवल एक सरकारी नोटिस का मामला नहीं रह गया है। RJD ने इसे सत्ता के दुरुपयोग, राजनीतिक प्रतिशोध और सरकारी संसाधनों के कथित पक्षपातपूर्ण वितरण का मुद्दा बनाकर चुनावी साल में बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और अधिक गरमाने के संकेत दे रहा है।

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