उत्तर प्रदेश में बदहाल स्कूलों की शिकायत लेकर लखनऊ से कन्नौज तक स्कूली बच्चे सड़कों पर उतर रहे हैं। पिछले एक महीने में कम से कम 5 जिलों में छात्रों ने अपनी शिकायतें सार्वजनिक कीं। उन्होंने सड़कें जाम कीं, कलेक्टरेट तक मार्च किया और हॉस्टल में खुद को बंद कर लिया। सरकार को अंत में सुनना पड़ा। ये सब सरकारी विद्यालय और नवोदय जैसे स्कूलों के छात्र हैं।
हर प्रदर्शन में छात्रों की एक जैसी मांग नजर आ रही है। छात्र ज्यादा शिक्षकों की मांग कर रहे हैं, बेहतर खाना, पंखा, पीने का साफ पानी, साफ टॉयलेट जैसी मांगें रख रहे हैं। छात्र चाहते हैं कि पंखे चलें, स्कूल साफ रहे और बुनियादी सुविधाएं ठीक हों।
यह भी पढ़ें: लखनऊ में Gen अल्फा आंदोलन पर क्यों उतरे? कई घंटे मनाया, तब लौटे स्कूल
क्यों धरने पर बैठ रहे जेन अल्फा?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ और उन्नाव में सर्वोदय आवासीय स्कूलों के बच्चे सबसे पहले सड़क पर आए। एक दिन छात्रों ने सड़क जाम की। तीन दिन बाद लड़कियों ने बारिश में बाईपास रोका। उन्नाव में भी छात्र प्लेकार्ड लेकर बैठ गए। टीचर की कमी, खराब खाना, गंदा पानी और स्कूल की सफाई की शिकायत थी। मंत्री और अधिकारी मौके पर पहुंचे। बातचीत के बाद आंदोलन खत्म हुआ।
स्कूल सुधारने का फॉर्मूला है आंदोलन?
फतेहपुर में करीब एक 1,000 छात्र स्कूल के बाहर इकट्ठा हुए। उन्होंने टूटी क्लासरूम, लीक होती छत, पंखे और फर्नीचर की मांग की। चार घंटे बाद जिला अधिकारी आए और आश्वासन दिया। उसके बाद पंखे लग गए, आरओ पानी का इंतजाम हो गया और दूसरी सुविधाएं भी मिल गईं।
हमीरपुर में आंदोलन से सड़क ठीक हो गई
हमीरपुर में बच्चे और उनके अभिभावक 5 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टरेट पहुंचे। स्कूल जाने वाली सड़क की मरम्मत की मांग थी। बारिश में सड़क बेहाल हो गई थी। कोर्ट ने भी नोटिस जारी किया। अब सड़क ठीक हो चुकी है।
यह भी पढ़ें: पंखे और डेस्क-बेंच के लिए बच्चों ने किया CJP जैसा प्रदर्शन, तुरंत मान ली गई मांग
कन्नौज में प्रशासन ने सुलझाईं समस्याएं
कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रों ने सुबह चार बजे हॉस्टल के कमरे बंद कर लिए। खाने, सफाई और पानी की शिकायत थी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी खुद आकर आश्वासन दें तभी दरवाजा खुलेंगे। जिलाधिकारी पहुंचे और समस्याएं सुलझाई गईं।
महोबा में छात्रों ने प्रदर्शन किया तो पुलिसकर्मियों ने लात मारकर उन्हें भगा दिया। प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है। लोगों में पुलिस और योगी सरकार के खिलाफ नाराजगी है।
क्या कह रहे हैं यूपी के अधिकारी?
अधिकारियों का कहना है कि एक जगह विरोध की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होती है तो दूसरे स्कूल के बच्चे भी उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं। सरकार ने अब सभी 103 आवासीय स्कूलों का निरीक्षण कराने का आदेश दिया है। जिला अधिकारियों को छात्रों से बात करने और स्थानीय समस्याएं तुरंत हल करने को कहा गया है। शिक्षकों की कमी का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। तब तक कॉन्ट्रैक्ट टीचर रखे जाएंगे। शिक्षा विभाग सोशल मीडिया को और सक्रिय बनाने की भी योजना बना रहा है ताकि छात्र और अभिभावक सीधे शिकायत कर सकें।