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'खाने को आटा तक नहीं', सुसाइड नोट लिख दे दी जान, कहा- बच्चों का ध्यान रखना

बुलंदशहर जिले में एक शुगर मिल में काम करने वाले कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली है। आत्महत्या करने से पहले शख्स ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था।

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sharif khan, photo credit - x

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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो रही हैं। बुलंदशहर के रहने वाले शरीफ खान ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की वजह भी उन्होंने अपने सुसाइड नोट में बताई है। शरीफ खां अनामिका शुगर मिल में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे।

 

शरीफ के मृत्यु के बाद उनकी बेटी ने अनामिका शुगर मिल पर आरोप लगया है कि इस मिल के वजह से पिता की जान गई है। बेटी ने पिता के शव को शुगर मिल के गेट के पास रखा और मिल के मालिकों के खिलाफ आरोप लगाया।

 

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सुसाइड नोट में क्या लिखा?

शरीफ खान ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवन खत्म कर लिया। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा 'सभी परिवार, भाई-बहन, रिश्तेदार और मिलने वालों को अस्सलाम वालेकुम। मुझे माफ करना, जो भी गलती हुई हो। मेरे परिवार का ध्यान रखना। मेरी लड़कियों को परेशान न होने देना, आप सबकी जिम्मेदारी है कि मेरे परिवार का ध्यान रखें। मैं बहुत परेशानी में यह कदम उठा रहा हूं। मेरे घर में आटा भी नहीं है।
खुदा हाफिज।
मो. शरीफ।'

 

इस नोट से स्पष्ट होता है कि वह आर्थिक तंगी से बेहद परेशान थे। घर में खाने के लिए आटा तक नहीं था, इसी कारण उन्होंने यह कठोर कदम उठाया।

 

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बेटी का आरोप

शरीफ खान की बेटी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता को शुगर मिल के मालिकों ने पिछले कई महीनों से वेतन नहीं दिया था। वेतन न मिलने के कारण उनके पिता मानसिक रूप से काफी परेशान रहते थे। इसी वजह से बेटी ने शुगर मिल के गेट पर शव रखकर हंगामा किया और न्याय की मांग की।

क्या होगी कार्रवाई?

भारत की कानून व्यवस्था के अनुसार, कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों का सैलरी बिना उचित कारण के नहीं रोक सकती। वेतन न देना कानूनी अपराध है। कर्मचारी वेतन न मिलने पर श्रम विभाग (Labour Department) में शिकायत कर सकते हैं या कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।

 

मुख्य रूप से वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 के तहत नियमित तारीख के बाद सैलरी न मिलने पर कर्मचारी कानूनी कदम उठा सकते हैं। इसमें कंपनी को नोटिस भेजना, श्रम न्यायालय में शिकायत करना या पुलिस में एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। दोषी पाए जाने पर कंपनी पर जुर्माना, ब्याज या सजा भी हो सकती है।


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