हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के बैंक खातों से जुड़े IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में मंगलवार को एक नाटकीय मोड़ आया है। इस केस के मास्टरमाइंड विक्रम वाधवा को मेडिकल टेस्ट के लिए जेल से अस्पताल भेजे जाने की अनुमति दी गई थी। बाद में DSP पूनम दिलावरी ने छापा मारा तो पता चला कि कुछ पुलिसकर्मी विक्रम वाधवा को लेकर एक होटल पहुंचे थे। इस होटल में विक्रम वाधवा अपने परिवार के लोगों के साथ लंच कर रहा था। अब इस केस में दो आरोपी पुलिसकर्मियों समेत कुल 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब इस केस में सीसीटीवी फुटे और कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घोटाला लगभग 645 करोड़ रुपये का है। इस केस का आरोपी विक्रम वाधवा पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह बुडैल जेल में बंद है। मेडिकल चेकअप के लिए अनुमति मिली थी कि उसे GMCH-16 ले जाया जाए। पुलिसकर्मियों की मिलीभगत का असर यह हुआ कि विक्रम वाधवा अस्पताल जाने के बजाय होटल पहुंच गए। ये पुलिसकर्मी उसे लेकर सेक्टर-17 में स्थित सिटी यार्ड होटल पहुंच गए थे।
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DSP ने छापा मारकर पकड़ा
इसकी सूचना DSP पूनम दिलावरी को दोपहर लगभग 1:30 पर मिली। उन्होंने तुरंत सिटी यार्ड होटल पर छापा मारा। वहां विक्रम वाधवा अपने परिवार के लोगों के साथ लंच कर रहा था और उसे जेल से लेकर निकले पुलिसकर्मी भी वहीं मौजूद थे। आशंका जताई जा रही है कि इन पुलिसकर्मियों ने इस काम के बदले रिश्वत ली होगी। इसी आरोप में SI जगमेहर और ASI सुरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही, विक्रम वाधवा के बेटों कुणाल (25) और करण (27) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि पुलिसकर्मियों की मदद से ही विक्रम वाधवा भगाने की फिराक में था लेकिन अचानक हुई छापेमारी ने खेल खराब कर दिया। अब होटल के CCTV फुटेज और कॉल डिटेल की जांच करके यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह कितनी देर से होटल में था और इस दौरान और किन लोगों से उसकी मुलाकात हुई।
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साथ ही, आरोपी पुलिसकर्मियों की भी छानबीन की जा रही है कि उन्होंने किस कारण से विक्रम वाधवा की मदद की। सभी आरोपियों को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने अब गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 7, धारा 199, धारा 261, 262, 62 और 61 (2) के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।