भारत और चीन के बीच करीब छह साल बाद जमीन के रास्ते व्यापार शुरू हो चुका है। व्यापारियों का पहला जत्था शनिवार को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शिपकी-ला दर्रे से तिब्बत को रवाना हुआ। उधर, सिक्किम के नाथू ला दर्रे से भी दोनों देशों के बीच व्यापार दोबारा आरंभ हो गया। 1962 के युद्ध के बाद सिक्किम का नाथू ला दर्रा बंद रहा। हालांकि दशकों बाद साल 2006 में दोनों देशों के बीच इसी रास्ते से व्यापार शुरू हुआ। 2020 में कोविड महामारी के कारण दोबारा व्यापार ठप हुआ।
हिमाचल प्रदेश के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिपकी-ला दर्रे पर नामग्या, डबलिंग और लियो गांवों के व्यापारियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पहले जत्था में 16 व्यापारी शामिल है। यह सभी व्यापारी शिपकी-ला दर्रे से चीन अधिकृत तिब्बत में पहुंचे।
1 अगस्त के शिपकी-ला दर्रे पर व्यापार शुरू हुआ। व्यापारियों को 72 घंटे के भीतर वापस लौटने का निर्देश दिया गया है। पहले बैच में व्यापारी अपने साथ गुड़, चावल, चाय, चीनी, कालीन, स्थानीय अनाज, बिस्कुट समेत अन्य अधिसूचित सामान ले जाएंगे।
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मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिपकी गांव में आधुनिक व्यापार केंद्र का उद्घाटन किया। इसे लगभग 17 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। मंत्री ने बताया कि किन्नौर के व्यापारियों को तिब्बत के दूर-दराज इलाकों की यात्रा करनी पड़ती थी। मगर व्यापार केंद्र बन जाने से एक की जगह पर माल का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
कोरोना महामारी के कारण 2019 से इस मार्ग से व्यापार बंद था। व्यापार दोबारा शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों में खुशी की लहर है। इससे भारत और चीन के बीच सुधरते द्विपक्षीय संबंधों की भी झलक मिलती है।
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वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय और सीमा शुल्क विभाग की अधिसूचित सूची के तहत भारत से चीन को 36 श्रेणियों के सामान का निर्यात होगा। वहीं चीन से भारत में 20 तरह का सामान लाया जा सकेगा। सूची में घोड़े, भेड़ और बकरी जैसे पशुओं को भी शामिल किया गया।