किन पैमानों पर हर साल सबसे स्वच्छ शहर बन जाता है इंदौर?
इंदौर 2017 से 'सबसे साफ शहर' बना हुआ है। मगर इसी इंदौर में गंदा पानी पीने से कइयों की मौत हो चुकी है। ऐसे में जानते हैं कि आखिर किन पैमानों पर इंदौर हर साल 'सबसे साफ शहर' बन जाता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit: PTI)
लगातार आठ साल तक देश के 'सबसे साफ शहर' होने का तमगा जिस इंदौर पर लगा है, वहां गंदे पानी की वजह से कइयों की मौत हो गई है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी की पाइपलाइन में गटर का पानी मिल गया और वही पानी घरों में चला गया। कइयो की मौत और हफ्ता गुजर जाने के बाद भी हालात सुधरे नहीं हैं। भागीरथपुरा में जांच के दौरान डायरिया के 20 नए मरीज मिले हैं। अब भी 142 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 11 ICU में हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में 2,354 परिवारों से 9,416 लोगों की जांच की गई है। भागीरथपुरा में डायरिया यानी हैजा की बीमारी फैलने के बाद से 398 मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज किया जा चुका है।
अधिकारियों का दावा है कि भागीरथपुरा इलाके में अब हालात काबू में हैं। चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हासनी ने बताया कि कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन (NIRBI) की टीम इंदौर आकर इसकी जांच कर रही है।
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सबसे साफ शहर में इतनी मौतें?
सबसे साफ रहने वाले इंदौर में गंदे पानी की वजह से इतनी मौतें होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद अब तक मौतों की संख्या को लेकर सही जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासन ने अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों का आंकड़ा रखा है। जबकि, स्थानीय लोगों ने 16 मौतों का दावा किया है, जिनमें एक 6 महीने का बच्चा भी शामिल है।
मैग्सेस अवॉर्ड से सम्मानित और 'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर राजेंद्र सिंह ने इसे 'सिस्टम क्रिएटेड डिजास्टर' बताते हुए आरोप लगाया कि इस त्रासदी के लिए भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, 'इंदौर जैसे शहर में ऐसा संकट कैसे हो सकता है, जिसे लगातार भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में रैंक किया गया है।'
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न्यूज एजेंसी PTI से बातचीत में उन्होंने कहा, 'अगर देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसी त्रासदी हो सकती है तो यह दिखाता है कि दूसरे शहरों में पीने के पानी की सप्लाई सिस्टम की हालत कितनी गंभीर होगी।'
उन्होंने कहा, 'यह संकट सिस्टम का बनाया गया है। पैसे बचाने के लिए ठेकेदार पीने की पानी की पाइपलाइन को ड्रेनेज लाइनों के बहुत पास बिछाते है।' उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है।
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जहां गंदा पानी, वह सबसे साफ कैसे?
2014 में केंद्र सरकार ने 'स्वच्छ भारत मिशन' शुरू किया था। 2016 से हर साल स्वच्छता सर्वे किया जा रहा है। 2017 से इंदौर देश का 'सबसे साफ शहर' बना हुआ है। 2025 में लगातार आठवीं बार इंदौर सबसे साफ शहर बना था।
अब सवाल यही उठ रहे हैं कि सबसे साफ शहर इंदौर में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सरकार की रिपोर्ट भी कहती है कि भागीरथपुरा में पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिल गया था। लैब रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो चुकी है कि गंदा पानी पीने से ही लोगों में डायरिया की बीमारी फैली है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब पानी ही गंदा है तो सबसे साफ शहर कैसे? दरअसल, हर साल जो स्वच्छता सर्वे किया जाता है, उसमें पीने का पानी कोई पैमाना ही नहीं है। यानी, कोई शहर साफ है या नहीं, उसमें वहां के पीने के पानी की कोई भूमिका नहीं है।
2025 के सर्वे में सरकार ने 10 पैमानों को शामिल किया था और इंदौर उन सभी में खरा उतरा हुआ था। स्वच्छता सर्वे के लिए जो पैमाने तय किए गए हैं, उसमें इंदौर हमेशा खरा उतरता है, इसलिए उसे 'सबसे साफ शहर' का तमगा मिल जाता है।
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किस पैमाने पर बना सबसे साफ शहर?
2016 से 2023 तक लगातार 7 साल तक इंदौर देश का सबसे साफ शहर रहा। 2024 में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने एक अलग कैटेगरी बनाई, ताकि बाकी शहरों को मौका मिले। इसे 'सुपर स्वच्छ लीग' नाम दिया गया। इसमें इंदौर, गुजरात के सूरत और महाराष्ट्र के नवी मुंबई के साथ एक बार फिर सबसे ऊपर रहा।
2017 और 2018 में जब सर्वे किया गया तो 434 शहरों की रैंकिंग में पैरामीटर्स को तीन कैटेगरी- म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन, इंडिपेंडेंट ऑब्जर्वेशन और सिटीजन फीडबैक में बांटा गया था।
म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन में इंदौर को 900 में से 875 नंबर मिले, जबकि इंडिपेंडेंट ऑब्जर्वेशन में 435 और सिटीजन फीडबैक में 496 नंबर मिले। 2017 की रिपोर्ट में बताया गया कि इंदौर में 100% डोर-टू-डोर कचरा सिलेक्शन और सोर्स पर ही कचरे को अलग-अलग करने का काम होता है।

इसके बाद 2017 से 2022 तक इंदौर हर साल टॉप पर रहा। 2023 में इंदौर और सूरत दोनों ही पहले नंबर पर रहे। 2023 में इंदौर को 'वॉटर+' सर्टिफिकेशन दिया गया था। इसका मतलब है कि कोई भी बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी खुले वातावरण या नदी-तालाबों में नहीं छोड़ा जाता है।
2023 के सर्वे में इंदौर को 9,500 में 9,348 नंबर मिले थे। 8 में से 7 पैमानों में इंदौर ने 100% परफॉर्म किया था। कचरा अलद-अलग करने में भी इंदौर का स्कोर 98% था।
2024-25 में इंदौर को इससे बाहर रखा गया और 'सुपर स्वच्छ लीग' कैटेगरी में रखा गया। इस कैटेगरी में इंदौर, सूरत और नवी मुंबई ने टॉप किया।
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