logo

ट्रेंडिंग:

पाइपलाइन में लीकेज, ऊपर टॉयलेट; इंदौर में पीने का पानी ऐसे बना जानलेवा

आठ साल से लगातार सबसे साफ शहर बने हुए इंदौर में गंदे पानी की वजह से कई लोगों की मौत हो गई है। अब लैब रिपोर्ट में कई बातों का खुलासा हुआ है।

indore

भागीरथपुरा में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। (Photo Credit: PTI)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में गंदा पानी पीने से 4 लोगों की मौत हो गई है। लगभग 1,400 लोग इससे प्रभावित हुए हैं। अब इसे लेकर लैब रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। लैब की टेस्ट रिपोर्ट में सामने आया है कि इंदौर में जो हालत बनी है, उसकी वजह पीने का गंदा पानी ही है। यह सब उस इंदौर में हुआ है, जो आठ सालों से लगातार सबसे साफ शहर बना हुआ है। लैब रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि सबसे साफ शहर इंदौर में जानलेवा पानी का सप्लाई सिस्टम है।

 

लैब रिपोर्ट से पता चला है कि पीने के पानी में हैजा फैलाने वाले बैक्टिरिया मौजूद थे। इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने का पानी गंदा हो गया था।

 

इंदौर में मौतों के आंकड़ों को लेकर भी कन्फ्यूजन बना हुआ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 लोगों की मौत की पुष्टि है। वहीं, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 लोगों की मौत की बात कही है।

 

यह भी पढ़ें-- 8 अफसरों को पीछे छोड़कर बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव बनीं नंदिनी कौन हैं?

पीने का पानी गंदा कैसे हुआ?

भागीरथपुरा के पानी की जांच इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की लैब में की गई थी। इस कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घंघोरिया ने कहा, 'शुरुआती रिपोर्ट में सीवर के पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिसमें इंसानी मल होता है।'

 

उन्होंने बताया कि हालांकि अभी तक बैक्टीरिया की पहचान नहीं कर पाए हैं, क्योंकि इसकी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने कहा कि मरीजों की स्टूल रिपोर्ट भी अभी नहीं मिली है, जिसके बाद ही बाकी चीजें साफ हो पाएंगी।

 

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पीने के पानी की पाइपलाइन में एक जगह पर लीकेज मिला है। इसके ऊपर एक टॉयलेट बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस लीकेज के कारण इलाके में पानी गंदा हो गया।

 

यह भी पढ़ें-- तेज रफ्तार कार से फेंक दिया, 12 टांके आए; फरीदाबाद रेप केस में क्या खुलासे हुए?

 

पाइपलाइन की जांच की जा रही

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, 'हम भागीरथपुरा में पीने के पानी की पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि पता चल सके कि कहीं और कोई लीकेज तो नहीं है।'

 

उन्होंने कहा कि जांच के बाद गुरुवार को भागीरथपुरा के घरों में पाइपलाइन के जरिए साफ पानी की सप्लाई की गई। हालांकि, एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं।

 

उन्होंने यह भी बताया कि भागीरथपुरा की त्रासदी से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य के लिए एक SOP जारी की जाएगी।

 

यह भी पढ़ें-- क्या है इमाम महमूदर काफिला जिसके 11 लोगों को असम पुलिस ने धर दबोचा?

अभी कैसे हैं हालात?

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा के 1,714 घरों के सर्वे के दौरान 8,571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण दिखे, जिन्हें उनके घरों पर ही प्राथमिक इलाज दिया गया।

 

उन्होंने बताया कि प्रकोप फैलने के बाद से आठ दिनों में 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को अब तक डिस्चार्ज किया जा चुका है। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में हैं।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap