बिहार के डीजी कुंदन कृष्णन की संपत्ति को लेकर सांसद सुधाकर सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया है कि कुंदन कृष्णन और उनकी पत्नी के नाम पर घोषित संपत्ति के अलावा भी कई ऐसी जमीनें हैं, जिनका संपत्ति विवरण में उल्लेख नहीं किया गया है। सांसद ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह किसी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि जनता के सामने सच्चाई रख रहे हैं। एक जिम्मेदार सांसद के तौर पर उनका कर्तव्य है कि यदि उन्हें कोई जानकारी मिलती है तो उसे सामने लाएं।
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पटना में जमीन होने का दावा
सुधाकर ने कैमूर, नालंदा और पटना के मालसलामी सहित कई जगहों पर जमीन होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर डीजी और उनके परिजनों के नाम पर जमीनें खरीदी गई हैं, लेकिन इनका उल्लेख संपत्ति विवरण में नहीं किया गया है। सांसद ने कहा कि कैमूर में कई एकड़ जमीन खरीदी गई है। नालंदा में भी जमीन का सौदा हुआ है। पटना के मालसलामी इलाके में भी जमीन होने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि ये सभी जमीनें उनकी घोषित संपत्ति से अलग हैं।
बिट्टू के नाम पर जमीन खरीदने का आरोप
सुधाकर ने रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह के नाम पर भी जमीन खरीदने का आरोप लगाया और इसे बेनामी संपत्ति से जोड़कर जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि बिट्टू सिंह के नाम पर खरीदी गई जमीन की भी जांच होनी चाहिए। आखिर किसके पैसे से यह जमीन खरीदी गई, यह सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की संपत्ति का नहीं है, बल्कि व्यवस्था का है। यदि एक बड़े अधिकारी की संपत्ति में इस तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा उठ जाएगा।
क्या बोले सांसद?
सांसद का दावा है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े दस्तावेज हैं और कुछ दस्तावेजों का सत्यापन अभी जारी है। उन्होंने कहा कि वह बिना दस्तावेज के कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनके पास जमीन के रजिस्ट्री से जुड़े कई कागजात हैं। कुछ और दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन पूरा होते ही वह सभी दस्तावेज जांच एजेंसी को सौंप देंगे।सुधाकर ने कहा कि वह चाहते हैं कि बिहार सरकार पूरे मामले की जांच कराए। जांच EOU, विजिलेंस या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मानहानि नोटिस
दरअसल, कुंदन कृष्णन की ओर से सुधाकर को पांच करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इस पर सुधाकर ने कहा है कि वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें नोटिस से कोई डर नहीं है। यदि कोई सच बोलने पर मानहानि का नोटिस भेजता है तो वह कोर्ट में जवाब देंगे। सच बोलना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि वह संसद में भी यह मामला उठाएंगे और जांच की मांग करेंगे।
सांसद सुधाकर के आरोपों के बाद बिहार की राजनीति में हड़कंप मच गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यदि सांसद के आरोप सही हैं तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। वहीं सत्तापक्ष के नेताओं ने कहा है कि बिना सबूत के किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं है।
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क्या बोले डीजी?
वहीं, इस पूरे मामले पर अभी तक डीजी कुंदन कृष्णन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, डीजी कार्यालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब सबकी निगाहें बिहार सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं।