उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर में चोरी और हत्या के प्रयास के मामले में 40 साल से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार पुलिस ने पकड़ लिया। कानपुर पुलिस की टीम ने बरेली के बरी बाबा आश्रम में दबिश देकर रामप्रकाश को गिरफ्तार किया। वह आश्रम में साधु का भेष धारण कर 'पागल बाबा' के नाम से रह रहा था। पुलिस को उसकी तलाश लंबे समय से थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। करीब 23 दिन तक रेकी और आश्रम के फेसबुक अकाउंट से मिले सुराग के बाद पुलिस उसके ठिकाने तक पहुंची।
मामला साल 1986 का है। फजलगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले अशोक सोनी ने 40 हजार रुपये की लूट और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले में काकादेव नई बस्ती निवासी रामप्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रामप्रकाश मूल रूप से कन्नौज के गुरसहायगंज क्षेत्र के नौसेरा गांव का रहने वाला था। मुकदमे में जेल जाने के बाद वह जमानत पर बाहर आया, लेकिन इसके बाद अचानक गायब हो गया।
जमानत के बाद गायब, कोर्ट ने जारी किया वारंट
जमानत मिलने के बाद रामप्रकाश अदालत में होने वाली सुनवाई में भी नहीं पहुंचा। लगातार गैरहाजिर रहने पर अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन करीब चार दशक तक उसका पता नहीं चल सका। पुलिस ने उसके पैतृक गांव नौसेरा में भी जानकारी जुटाई। वहां से पुलिस को पता चला कि रामप्रकाश साधु बन चुका है और लंबे समय से सामान्य जिंदगी से दूर रह रहा है।
यह भी पढ़ें: ग्रीन गैस कर्मचारी बनकर 23.50 लाख की ठगी, मास्टरमाइंड सलोनी मुंबई से गिरफ्तार
फेसबुक ने खोल दिया 40 साल पुराना राज
जांच के दौरान पुलिस के हाथ बरेली स्थित बरी बाबा आश्रम का फेसबुक अकाउंट लगा। आश्रम के फेसबुक पेज पर पता और तस्वीरें मौजूद थीं। पुलिस ने इन जानकारियों को खंगाला तो रामप्रकाश के आश्रम में होने का सुराग मिला। इसके बाद कानपुर पुलिस की टीम ने बरेली पहुंचकर आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। पुलिस ने करीब 23 दिन तक रेकी की। टीम ने वहां रहने वाले साधुओं और आश्रम से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
'पागल बाबा' बनकर आश्रम में रह रहा था
रेकी के बाद पुलिस को यकीन हो गया कि आश्रम में ‘पागल बाबा’ के नाम से रह रहा साधु कोई और नहीं बल्कि 40 साल से फरार रामप्रकाश ही है। इसके बाद पुलिस ने मौका देखकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक रामप्रकाश ने इतने लंबे समय में अपना हुलिया और पहचान बदल ली थी। वह साधु के भेष में आश्रम में रह रहा था, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान पुराने आरोपी के रूप में नहीं हो सकी।
यह भी पढ़ें: 'सीटें नहीं, जीत मायने रखती है', अखिलेश यादव का संदेश; अब क्या करेगी कांग्रेस?
40 साल बाद आया पुलिस की गिरफ्त में
कानपुर पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि आरोपी करीब चार दशक से पुलिस और अदालत की नजरों से दूर था। पुराने मुकदमे में जमानत के बाद उसके गायब होने और लगातार कोर्ट में पेश नहीं होने के कारण उसके खिलाफ वारंट जारी था। बरेली के आश्रम में छिपे रामप्रकाश तक पहुंचने में उसके पैतृक गांव से मिली जानकारी और आश्रम के फेसबुक अकाउंट ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस की लंबी रेकी के बाद आखिरकार उसकी पहचान पक्की हुई और उसे गिरफ्तार कर कानपुर लाया गया।