उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ग्रीन गैस लिमिटेड का कर्मचारी बनकर साइबर ठगी करने वाले गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। लखनऊ के एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की ठगी के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने मुंबई से 45 वर्षीय सलोनी कुमारी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सलोनी अपने साथियों के साथ मिलकर गैस कनेक्शन और बिल अपडेट करने के नाम पर लोगों को फंसाती थी और उनके मोबाइल में खतरनाक APK फाइल डाउनलोड करवाकर बैंकिंग जानकारी और OTP हासिल कर रकम उड़ा देती थी।
पुलिस के मुताबिक, सलोनी कुमारी 12वीं पास है और करीब पांच साल से साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़ी थी। उसके कई साथी अभी फरार हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क के सदस्यों और ठगी की रकम के लेनदेन का पता लगाने में जुटी है।
जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्य WhatsApp मैसेज और फोन कॉल के जरिए ग्रीन गैस लिमिटेड के ग्राहक को संपर्क करते थे। वे खुद को कंपनी का कर्मचारी बताते और कहते कि गैस कनेक्शन या बिल से जुड़ी जानकारी अपडेट करना जरूरी है।इसके बाद ग्राहक को एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था। ठग भरोसा कायम करने के लिए करीब 10 रुपये का छोटा भुगतान करने के लिए भी कहते थे। जैसे ही ग्राहक बताए गए तरीके से प्रक्रिया पूरी करता, उसके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी ठगों तक पहुंच जाती थी।
APK डाउनलोड कराते ही खाली होने लगता था खाता
पुलिस के मुताबिक, APK फाइल इस तरह तैयार की गई थी कि उसके जरिए पीड़ित की बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल की जा सके। डेबिट कार्ड की जानकारी और दूसरे बैंकिंग क्रेडेंशियल हासिल करने के बाद ठग OTP तक पहुंच बना लेते थे।इसके बाद पीड़ित के खाते से बिना अनुमति रकम निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का रास्ता साफ हो जाता था। इसी तरीके से लखनऊ के एक बुजुर्ग को निशाना बनाकर 23.50 लाख रुपये की ठगी की गई।
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ठगी की शिकायत मिलने के बाद लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की कड़ियों को खंगालना शुरू किया। टेलीकॉम कंपनियों और बैंकों से मिली तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को जांच के दौरान मुंबई में सलोनी कुमारी के बारे में सुराग मिला।इसके बाद पुलिस टीम ने मुंबई पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 1.08 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
पांच साल से ठगी के नेटवर्क में सक्रिय
पुलिस जांच में सामने आया है कि सलोनी करीब पांच साल से इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। पुलिस को शक है कि उसकी भूमिका सिर्फ ठगी की रकम हासिल करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह रकम को इधर-उधर करने में भी मदद करती थी।जांचकर्ताओं के मुताबिक, सलोनी परिचित लोगों को उनके क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच देती थी। इसके लिए वह क्रेडिट कार्ड की जानकारी जुटाकर गैंग के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाती थी।
पुलिस के अनुसार, बैंक खातों से निकाली गई रकम का इस्तेमाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में किया जाता था। इसके बाद संबंधित कार्डधारक से उतनी ही रकम नकद में ले ली जाती थी।इस तरह साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे बैंक खाते में रखने के बजाय क्रेडिट कार्ड भुगतान और नकद लेनदेन के जरिए इधर-उधर किया जाता था। पुलिस को एक दुकान का CCTV फुटेज भी मिला है, जिसमें सलोनी इसी तरह के एक क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए जाती दिखाई दे रही है।
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'ऑपरेशन CYVAJRA' में पहली गिरफ्तारी
सलोनी की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन CYVAJRA' के तहत हुई है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के 34 मामलों में यह पहली गिरफ्तारी है।पुलिस अब सलोनी से पूछताछ कर उसके फरार साथियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गैंग ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।