मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने आज खत्म करवा दिया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और आंदोलन के नेता अमित भटनागर को अस्पताल पहुंचाया। यह कार्रवाई तब हुई जब 14 दिनों से भटनागर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। पुलिस का कहना है, सभी को उनकी सुरक्षा और खराब होती सेहत को देखते हुए शांतिपूर्वक घर भेजा गया है। अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बराना नदी के किनारे कुपी गांव के पास बने प्रदर्शन स्थल को भी हटवा दिया है। प्रदर्शनकारियों द्वारा बनाई गई प्रतीकात्मक चिताओं को भी हटाया दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश के बाद क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने की वजह से प्रदर्शनकारियों को पानी से बाहर लाने का फैसला लिया गया।
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अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन
आंदोलनकारियों का आरोप है कि विस्थापित होने वाले परिवारों को सही मुआवजा नहीं मिला है। प्रशासन ने अप्रैल में दिए गए अपने आश्वासनों को भी पूरा नहीं किया है। उन्होंने मांगों को लेकर और पुनर्वास के पुराने वादों को पूरा न किए जाने के विरोध में आनोखे तरीके अपनाए। इस पूरे आंदोलन में मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सरकार के खिलाफ 'जल सत्याग्रह', 'चिता सत्याग्रह' और यहां तक कि प्रतीकात्मक 'फांसी सत्याग्रह' करके पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।
लेकिन, केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के खिलाफ चल रहे यह बड़ा आंदोलन आज अचानक समाप्त हो गया। पुलिस ने अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को सुबह-सुबह वहां से हटा दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच विवाद खड़ा हो गया।
भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा करने वाले थे भटनागर
इस घटना पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से आ रहे बयानों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दिव्या अहिरवार जैसी प्रमुख नेताओं का आरोप है कि आंदोलन के मुख्य नेता अमित भटनागर सहित अन्य लोगों को जबरन गिरफ्तार कर लिया। उनका दावा है कि आज भटनागर केन-बेतवा प्रोजेक्ट में हुए 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा करने वाले थे। इसलिए उन्हें रोका गया है।
हालांकि, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सुरक्षा और मानवीय आधार पर की गई है।
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पुलिस ने क्या बताया?
आदित्य पटले के मुताबिक, जहां पर ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे थे, वहां पुल का बनाने का काम चल रहा है। लगातार बारिश की वजह से बराना नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा था। इससे आंदोलनकारियों की सुरक्षा को खतरा था। दूसरी ओर कई दिनों से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से अमित भटनागर समेत कई प्रदर्शनकारियों की तबीयत भी बिगड़ रही थी।
इसलिए डॉक्टरों की टीम के साथ पुलिस वहां पहुंची और प्रशासन ने सभी को शांतिपूर्वक वहां से हटाया। भटनागर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य प्रदर्शनकारियों को उनके घर भेज दिया गया।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट है क्या?
केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो योजना है। इसका मकसद केन नदी का अतिरिक्त पानी बेतवा नदी तक पहुंचाकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पीने के पानी की सुविधा बढ़ाना है।
सरकार का कहना है कि इससे वहां के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, इस परियोजना से प्रभावित परिवारों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों का कहना है कि इससे लोगों का विस्थापन होगा। इसके अलावा पन्ना टाइगर रिजर्व समेत जंगलों और वन्यजीवों पर भी इसका असर पड़ेगा। इसलिए वे इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।