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फर्जी पुलिस बनकर कारोबारी का अपहरण, 13 लाख की फिरौती वसूलने वाले 6 गिरफ्तार

लखनऊ में फर्जी पुलिस बनकर कारोबारी का अपहरण कर 13 लाख की फिरौती वसूलने के मामले में पुलिस ने 6 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस मास्टरमांइड और एक करीबी की तलाश कर रही है। पढ़ें रिपोर्ट

Lucknow Police

पुलिस हिरासत में पकड़े गए आरोपी, Photo Credit: Lucknow Police

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी का अपहरण करने और 13 लाख रुपये की फिरौती वसूलने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का कृष्णानगर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चार आरोपी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और दो बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। आरोपियों ने कारोबारी को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर लखनऊ से आगरा और कन्नौज के रास्तों पर घुमाया था।

 

डीसीपी साउथ मोहम्मद मुश्ताक ने रविवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 12 सितंबर 2026 को आलमबाग के साकेत अपार्टमेंट निवासी कारोबारी सुदर्शन घोष अपने ऑफिस जा रहे थे। इसी दौरान कृष्णानगर क्षेत्र में बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और फर्जी पुलिस आईडी कार्ड दिखाकर पूछताछ के बहाने उन्हें जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया।

 

इसके बाद बदमाशों ने कारोबारी को डराया-धमकाया और मारपीट की। उनकी कनपटी पर तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद करीब नौ घंटे तक उन्हें गाड़ी में बंधक बनाकर लखनऊ से आगरा और कन्नौज के रास्तों पर घुमाया गया।

पत्नी को फोन कराकर मांगी 13 लाख की फिरौती

बदमाशों ने कारोबारी से जबरन उनकी पत्नी को फोन कराया और उन्हें छोड़ने के बदले भारी रकम की मांग की। डर के कारण कारोबारी की पत्नी ने फिरौती की रकम की व्यवस्था की। पीड़ित के ड्राइवर के माध्यम से बदमाशों को करीब 13 लाख रुपये नकद के साथ सोने-चांदी के जेवरात भी सौंपे गए।फिरौती की रकम और जेवरात मिलने के बाद आरोपियों ने रात करीब साढ़े 10 से 11 बजे के बीच कारोबारी को शहीद पथ के पास सड़क किनारे छोड़ दिया और फरार हो गए। बदमाशों के चंगुल से छूटने के बाद कारोबारी रात में ही कृष्णानगर थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना बताई। इसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

 

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240 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली

मामले के खुलासे के लिए पुलिस की आठ टीमें लगाई गईं। टीमों ने करीब 220 से 240 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंचने वाली कड़ियां जोड़ीं। जांच में सामने आया कि आरोपी एक संगठित अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का हिस्सा हैं, जो पैसे वाले लोगों की रेकी कर अपहरण और फिरौती की वारदात को अंजाम देता है।जांच में यह भी सामने आया कि कारोबारी का ही एक बेहद करीबी परिचित गिरोह के संपर्क में था। उसने आरोपियों को कारोबारी के पास काफी पैसा होने की जानकारी दी थी। इसके बाद सोची-समझी साजिश के तहत अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया।

बुलंदशहर और मुजफ्फरपुर के आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने बुलंदशहर निवासी अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार और आकाश चौधरी को गिरफ्तार किया है। इनके अलावा बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी अनुराग कुमार और मनीष कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आकाश और अनुराग के खिलाफ पहले से भी संगीन मुकदमे दर्ज हैं।आरोपियों के कब्जे से पुलिस अधिकारी के चार फर्जी आईकार्ड, 2.50 लाख रुपये नकद, दो अवैध तमंचे, तीन कारतूस, फर्जी नंबर प्लेट और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद हुई है।

 

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मास्टरमाइंड और करीबी की तलाश जारी

डीसीपी साउथ ने बताया कि गिरोह के मास्टरमाइंड और कारोबारी की मुखबिरी करने वाले उसके करीबी की पहचान हो चुकी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगी हैं और जल्द उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही गई है।सनसनीखेज अपहरण कांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को डीसीपी साउथ की ओर से 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है।


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