उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों ने एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी को कथित तौर पर छह दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 95.66 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। पीड़ित को मुंबई के एक कथित अपहरणकांड से जोड़कर गिरफ्तार करने और जेल भेजने की धमकी दी गई।
पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इंदिरानगर सेक्टर-8 निवासी 66 वर्षीय आदेश कुमार यादव 31 जनवरी 2020 को इंडियन बैंक से सेवानिवृत्त हुए थे। शिकायत के मुताबिक, 17 सितंबर की सुबह करीब 11:15 बजे उन्हें एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से मुंबई में एक सिम खरीदा गया है, जिसका इस्तेमाल अपहरण के मामले में हुआ है। इसके बाद कथित साइबर अपराधियों ने उनसे लगातार पूछताछ शुरू कर दी।
फर्जी कोर्ट वारंट भेजकर डराया
जालसाजों ने पीड़ित को बताया कि उनके खिलाफ मुंबई में रिपोर्ट दर्ज है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद फर्जी दस्तावेज और कोर्ट का कथित वारंट भेजकर उन्हें डराया गया। पीड़ित को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रहने के लिए कहा गया। आरोप है कि जालसाजों ने उन्हें किसी से संपर्क करने पर कार्रवाई की धमकी भी दी।
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खातों में ट्रांसफर कराए 95.66 लाख
डर की वजह से पीड़ित ने जालसाजों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। शिकायत के अनुसार, कुल 95,65,700 रुपये ट्रांसफर किए गए।जालसाजों ने कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।
छह दिन बाद ठगी का हुआ एहसास
लगातार छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रहने के बाद 24 सितंबर को पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद वह साइबर क्राइम थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब रकम जिन खातों में भेजी गई, उनकी जांच के साथ-साथ कॉल, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
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पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के वीडियो कॉल या फोन पर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी अधिकारी बताने पर तुरंत भरोसा न करें। किसी के दबाव में आकर बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर न करें और संदिग्ध कॉल की सूचना तत्काल साइबर क्राइम पुलिस को दें। पुलिस या कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को इस तरह ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर पैसे जमा कराने का आदेश नहीं देती।