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23 दिन डिजिटल अरेस्ट, ATS का डर और 16 लाख की ठगी, बुजुर्ग को ऐसे बनाया शिकार

लखनऊ में साइबर ठगों ने एटीएस अधिकारी बनकर 82 वर्षीय बुजुर्ग को 23 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। जब पोल खुला, तब तक सब कुछ लुट चुका था।

Digital Arrest

प्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Credit: Sora

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों ने गोमतीनगर विस्तार निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग को 23 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर 16.09 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसने और गिरफ्तारी का डर दिखाया। दावा किया गया कि उनके नाम से जुड़े ICICI बैंक के एटीएम कार्ड से 2.56 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इतना ही नहीं, ठगों ने मामले को पुलवामा आतंकी हमले से जोड़कर डर का माहौल बनाया और जांच के नाम पर बैंक खातों में मौजूद रकम अपने बताए खातों में ट्रांसफर करा ली। 

पीड़ित विजय प्रकाश गुप्ता के पास तीन सितंबर को एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को गोमतीनगर विस्तार से एटीएस अधिकारी बताया। इसके बाद बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर कुछ अन्य लोगों से भी बात कराई गई। जालसाजों ने दावा किया कि उनके नाम से जुड़े आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम कार्ड से 2.56 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है और मामला गंभीर है। ठगों ने बुजुर्ग को यह कहकर और डराया कि उक्त एटीएम कार्ड पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ी एक रेड के दौरान बरामद हुआ था। इसके बाद उन्हें लगातार अपने निर्देशों के मुताबिक चलने के लिए दबाव में रखा गया।

 

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पासबुक, चेकबुक और आधार की फोटो तक मंगाई

जालसाजों ने बुजुर्ग से उनके चार बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक की फोटो मांगी। इसके साथ आधार कार्ड की वीडियो फोटो भी मंगाई गई। जांच का हवाला देते हुए कहा गया कि खातों में मौजूद रकम की जांच करनी है और इसके लिए पैसा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करना होगा।

 

ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी और बुजुर्ग को निर्दोष होने का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। गिरफ्तारी के डर और जालसाजों की लगातार निगरानी के चलते पीड़ित उनकी बातों में फंसते चले गए।

3 बार में खाते से निकल गए 16.09 लाख रुपये

जालसाजों के कहने पर पीड़ित ने 15 सितंबर को 6.85 लाख रुपये और 17 सितंबर को 6.74 लाख रुपये RTGS के जरिए अलग-अलग खातों में भेज दिए। इसके बाद 25 सितंबर को 2.50 लाख रुपये और एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इस तरह 23 दिनों तक चले डिजिटल अरेस्ट के दौरान बुजुर्ग से कुल 16.09 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। 

 

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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डरें नहीं, ये सावधानियां जरूरी

पुलिस, एटीएस या किसी जांच एजेंसी के नाम पर अगर वीडियो कॉल आए तो उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर वीडियो कॉल पर लगातार बने नहीं रहना चाहिए और फर्जी गिरफ्तारी, वारंट या मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की धमकी से डरकर उसके निर्देश नहीं मानने चाहिए। जांच के नाम पर किसी दूसरे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।

कोई अधिकारी बनकर ओटीपी, एटीएम पिन, बैंक खाते की जानकारी, आधार की जानकारी, पासबुक या चेकबुक की फोटो मांगे तो ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर बैंक से जुड़ा कोई लेनदेन भी नहीं करना चाहिए।

अगर ऐसी कॉल आती है तो तुरंत परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साइबर ठगी होने पर देरी किए बिना 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए।

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