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विरोध के बाद पीछे हटी थी महाराष्ट्र सरकार, ड्राइवरों को मराठी बोलनी ही पड़ेगी?

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अब जरूरी हो गया है, न सीखने पर लाइसेंस रद्द होगा। सरकार के नए नियम को लेकर लंबे समय से विवाद क्यों चल रहा? समझें पूरी बात।

Maharashtra Marathi Language Rule,

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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महाराष्ट्र में अब ऑटो और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य हो गया है। महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के तहत सरकार ने नया नियम बना दिया है। अब जो ड्राइवर मराठी नहीं जानते, उन पर सख्ती होगी। पहले नोटिस मिलेगा, फिर लाइसेंस बंद हो सकता है। आखिर में परमिट भी रद्द हो सकता है। सरकार के इस नियम को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। अब फिर से यह चर्चा में है। मई 2026 में इस नियम को लेकर जमकर विरोध भी हुआ था।

 

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि सबको मराठी सीखने के लिए काफी समय दिया जा चुका है, अब और मोहलत नहीं मिलेगी। राज्य में करीब 1,65,000 ऐसे ड्राइवर रजिस्टर्ड थे जिन्हें मराठी नहीं आती थी, इनमें से 1,40,000 से ज्यादा ने ट्रेनिंग लेकर मराठी सीख ली है लेकिन 7,750 ड्राइवर टेस्ट में फेल हो गए, और 25,000 से ज्यादा अभी तक सर्टिफिकेट ही नहीं ले पाए। 

 

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क्या है पूरा विवाद?

महाराष्ट्र में हजारों ऑटो-टैक्सी ड्राइवर दूसरे राज्यों से आकर काम करते हैं, उन्हें मराठी नहीं आती। कुछ महीने पहले राज्य सरकार ने कहा कि मराठी न जानने वालों का लाइसेंस रद्द होगा, तो यहीं से ड्राइवरों में गुस्सा फैल गया। यूनियनों का कहना था कि करीब 60 फीसदी चालकों को मराठी नहीं आती, सरकार ने सीखने के लिए जितना समय दिया है, उतने समय में मराठी सीखना मुश्किल है। इससे उनकी रोजी-रोटी छिन सकती है।

 

इसपर सरकार का कहना है कि यह 1989 से चला आ रहा पुराना कानून है, बस अब सख्ती से लागू हो रहा है। मंत्री सरनाइक का कहना है कि महाराष्ट्र में काम करना है तो मराठी आनी चाहिए, इससे यात्रियों से बातचीत और सफर ज्यादा सुरक्षित होगा। बता दें कि, 1989 में एक पुराना कानून था कि ऑटो-टैक्सी चलाने वालों को मराठी आनी चाहिए, लेकिन कोई सख्ती नहीं थी। 500 तक का हल्का-फुल्का जुर्माना लगता था, जिसे लोग भरकर काम चलाते रहे। अब इसमें सख्ती बढ़ाई गई है।

जिन 1,65,000 से ज्यादा लोगों ने मराठी भाषा सीख ली है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हमें उन लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई करनी होगी जो मराठी नहीं सीखते। हमारी सरकार चाहती है कि लोग यहां काम करने आएं। अगर आप कहते हैं कि आप मराठी नहीं सीखेंगे, तो काम नहीं चलेगा। जो लोग मराठी नहीं जानते, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जो लोग मराठी भाषा नहीं सीखेंगे, उनके लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए जाएंगे। प्रताप सरनाईक, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री

सरकार, ड्राइवर और सियासत कौन हैं इसमें शामिल?

महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक इस फैसले के मुख्य चेहरे हैं, जिनकी अगुवाई में मराठी अनिवार्यता का नियम बना। दूसरी तरफ राज्य के हजारों प्रवासी ऑटो-टैक्सी चालक हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर यहां काम करते हैं और उन्हें मराठी नहीं आती। ऑटो-टैक्सी चालक यूनियनों ने शुरू में विरोध किया, बाद में बातचीत के बाद समर्थन दिया। 

 

इसके अलावा, सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक रूप से भी मामला बंटा नजर आया, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने समर्थन किया, जबकि कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार और सपा विधायक अबू आजमी ने इसकी आलोचना की। 

 

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कब, क्या हुआ?

  • 1989 में महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स रूल्स में पहले से नियम था कि चालकों को मराठी आनी चाहिए, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया।
  • 1 मई 2026 को सरकार ने ऐलान किया कि सभी ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य होगा।
  • 1 मई से 15 अगस्त तक सत्यापन अभियान शुरू करने का ऐलान हुआ। शुरुआती में मराठी न जानने वालों का लाइसेंस सीधे रद्द करने की बात कही गई।
  • मई 2026 के शुरुआती हफ्ते में ड्राइवरों और यूनियनों का कड़ा विरोध शुरू किया,  4 मई को हड़ताल का ऐलान किया गया।
  • मई 2026 को मंत्री सरनाइक ने फैसला बदला, लाइसेंस कैंसिलेशन होल्ड पर डाला गया और हड़ताल वापस ली गई।
  • 8 जुलाई 2026: महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 की औपचारिक अधिसूचना जारी की, 16 अगस्त से लागू होना तय हुआ।
  • 1 अगस्त 2026: बाइक-टैक्सी ऑपरेटरों के लिए अलग नियम लागू
  • 12 से 13 अगस्त 2026 को मंत्री सरनाइक ने साफ किया कि डेडलाइन नहीं बढ़ेगी।

 बता दें कि 15 अगस्त 2026 को 105 दिन की ट्रेनिंग समय-सीमा खत्म हो गई है। 16 अगस्त 2026 को यह नया नियम पूरी तरह लागू हो गया। नियम के तहत टेस्ट में फेल होने पर पहले 3 महीने लाइसेंस निलंबन, फिर परमिट रद्द हो सकती है। मंत्री सरनाइक ने बताया कि 1,65,000 में से 1,40,000 से ज्यादा चालकों ने ट्रेनिंग पूरी की।

 

करीब 7,750 चालक टेस्ट में फेल हुए, 25,000 से ज्यादा अब भी प्रमाणित नहीं ( इनमें से 17,427 ने ट्रेनिंग समय पर पूरी नहीं की)। हालांकि, इन्हें दोबारा ट्रेनिंग-टेस्ट का मौका और एक महीने की मोहलत मिलेगी।

क्यों लाया गया है यह नियम?

सरकार का तर्क है कि इस नियम से यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर बातचीत हो सकेगी। खासकर आपातकालीन स्थितियों में, यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी है। मंत्री सरनाइक का कहना है कि अगर किसी को महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है, तो मराठी जानना जरूरी है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह बड़ी संख्या में प्रवासी चालकों की आजीविका पर सीधा असर डालता है, और इसे महाराष्ट्र में भाषाई-पहचान की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

कहां होगा इस नियम का असर?

बता दें कि इस नियम का असर पूरे महाराष्ट्र में होगा। यह राज्य के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के जरिए लागू किया जाएगा, खासकर मुंबई, ठाणे, मीरा-भायंदर और पुणे जैसे बड़े शहरों में, जहां बाहर से आए यानी प्रवासी चालकों की संख्या सबसे ज्यादा है।

अब आगे क्या?

सरकार इसके लिए सर्वे और सत्यापन अभियान के साथ-साथ फर्जी लाइसेंस, नकली बैज और बैज से जुड़ी गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है। जो चालक अभी भी मराठी नहीं जानते, उन्हें प्रशिक्षण केंद्र भेजा जाएगा और आगे भी ट्यूशन की सुविधा दी जाएगी ताकि वे मराठी सीख सकें। इसके अलावा, जो 7,750 चालक टेस्ट में फेल हुए हैं, उन्हें दोबारा ट्रेनिंग दी जाएगी और फिर से परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा। 

 

बताया जा रहा है कि जिन 25,000 से ज्यादा चालकों ने अभी तक ट्रेनिंग पूरी नहीं की, उन्हें भी जांच में पकड़े जाने पर एक महीने की मोहलत वाला नोटिस मिलेगा। मंत्री सरनाइक ने साफ किया है कि अब कोई और एक्सटेंशन नहीं मिलेगा, यानी नोटिस के बाद भी अगर किसी चालक ने मराठी नहीं सीखी, तो उसका लाइसेंस निलंबित या स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।


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