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ललिता गौतम केस: प्रदर्शन से SSP अविनाश पांडे के थप्पड़ तक, हंगामा क्यों बरपा है?

मेरठ पुलिस का कहना है कि ललिता गौतम हत्याकांड को गैर जरूरी तूल दिया जा रहा है। क्यों हंगामा बरपा है, पढ़ें रिपोर्ट।

SSP Avinash Pandey

मेरठ के SSP अविनाश पांडे। Photo Credit: Meerut Police

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मेरठ में 20 वर्षीय छात्रा ललिता गौतम की हत्या का मामले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। ललिता 15 मई को अचानक लापता हो गईं थीं, उनकी लाश अगले दिन रोहतास इलाके में एक गन्ने के खेत में मिला था। वह बीए अंतिम वर्ष की छात्रा थीं। घरवालों का कहना है कि पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती है। इंसाफ की आस में परिजन और कुछ समर्थकों ने कमिश्नरी पार्क और कलेक्टरेट गेट पर प्रदर्शन किया लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ाकर पीटा।

 

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जांच में ढिलाई और लीपा-पोती का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों ने सबसे ज्यादा आलोचना एसएसपी अविनाश पांडे की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर तमाचा जड़ा, और बदसलूकी की। हंगामा भी तब शुरू हुआ, जब एसएसपी अविनाश पांडे भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और सड़क खाली करने को कहा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क छोड़ने से इनकार कर दिया।

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अविनाश पांडे ने युवक को जड़ा थप्पड़

पुलिस ने हल्का बल इस्तेमाल किया। कई लोगों को लाठियां पड़ी, कुछ लोगों को पुलिस ने तमाचा जड़ा। और 5 लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें एसएसपी अविनाश पांडे पुलिस वैन के अंदर एक युवक को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं।

क्या है ललिता गौतम हत्याकांड?

ललिता गौतम बीए अंतिम वर्ष की छात्रा थीं। 15 मई को वह TP नगर से परीक्षा देने निकली थीं। अगले दिन 16-17 मई को उनकी लाशका शव रोहता इलाके के गन्ने के खेत में मिला। पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश कुमार को 18 मई को गिरफ्तार किया था, जो ललिता का रिश्तेदार था। बाद में वह जमानत पर छूट गया। 
परिवार और दलित समुदाय का कहना है कि आरोपी के पूरे परिवार और अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

SSP अविनाश पांडेय ने क्या कहा है?

सएसपी अविनाश पांडे ने कहा कि मुख्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है और जांच चल रही है। परिवार पहले जांच से संतुष्ट था, लेकिन बाहर के कुछ लोग उन्हें भड़का रहे हैं। पुलिस का आरोप है कि नोएडा के रवि गौतम और भारतीय किसान यूनियन (आंबेडकर गुट) के नेता दिग्विजय सिंह भाटी जैसे लोग इस प्रदर्शन के पीछे हैं। दोनों पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का दावा है कि ये लोग घटना को जातीय रंग देने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। 

 

 



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अविनाश पांडेय सबके निशाने पर क्यों हैं?

वीडियो में एसएसपी अविनाश पांडे सड़क पर प्रदर्शनकारियों से बात करते और पुलिस वैन में चढ़कर अंदर बैठे लोगों को मारते दिख रहे हैं। रवि गौतम ने आरोप लगाया कि उन पर मारपीट की गई, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की। पुलिस ने मारपीट से इनकार किया है और कहा कि सड़क जाम करने और उकसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

लोग क्या कह रहे हैं?

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा आलोचना SSP अवनाश पांडेय की हो रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर पुलिस के जरिए अन्याय करने का आरोप लगाया है। चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। अखिलेश यादव ने कहा है कि दोषी को सजा मिलनी चाहिए और निर्दोष नहीं फंसना चाहिए।

 

 

 

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SSP अविनाश पांडे हैं कौन?

अविनाश पांडे 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश कैडर में वह तैनात हैं। इनका जन्म 3 फरवरी 1988 को लखीमपुर खीरी में हुआ। उन्होंने विज्ञान में ग्रेजुएशन किया है। अपनी सेवा के दौरान उन्हें दो बार डीजी कमेंडेशन डिस्क, सिल्वर मेडल (2022) और गोल्ड मेडल (2025) मिल चुका है। अविनाश पांडेय, मेरठ में प्रदर्शनकारियों के कथित दमन को लेकर सुर्खियों में हैं। 

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