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UP: सुजलाम शक्ति समूह से जुड़ीं 5 लाख महिलाओं ने की 1.43 करोड़ जल नमूनों की जांच

यूपी में महिलाएं हर घर पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत प्रशिक्षित करीब पांच लाख महिलाएं फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की शुद्धता की जांच कर रही हैं।

पेयजल के नमूनों की जांच करती महिला।

पेयजल के नमूनों की जांच करती महिला।

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उत्तर प्रदेश नवरात्रि के दौरान नारी शक्ति के सामर्थ्य और संकल्प की काफी चर्चा हो रही है। यूपी में महिलाएं हर घर पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत प्रशिक्षित करीब पांच लाख महिलाएं फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की शुद्धता की जांच कर रही हैं। सुजलाम शक्ति समूह के रूप में संगठित ये महिलाएं ग्रामीणों को सुरक्षित पानी के उपयोग और जल संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। महिलाओं की इस भागीदारी से उन्हें आय अर्जित करने का अवसर भी मिल रहा है।

 

जल जीवन मिशन 1.0 में प्रत्येक राजस्व गांव से पांच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया था। अब यही प्रशिक्षित महिलाएं जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलाम शक्ति समूह के रूप में गांवों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी कर रही हैं। एफटीके के जरिए जल गुणवत्ता जांच का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 से अब तक कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया गया है। 

 

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पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण

इस कार्य के लिए प्रशिक्षित महिलाओं, आंगनबाड़ी वर्कर और आशा वर्कर्स को पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराई जाती है। इसके माध्यम से पानी में आयरन, नाइट्रेट, क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक स्तर पर जांच की जाती है। ये महिलाएं प्रत्येक माह फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी), विद्यालय, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों व हैंडपंप सहित विभिन्न स्रोतों से पेयजल के नमूनों की जांच करती हैं। जिसके बदले में उन्हें निर्धारित मानदेय के आधार पर भुगतान किया जाता है। 

संरक्षण का भी जिम्मा

जल निगम के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस दौरान सुरक्षित पेयजल के उपयोग और जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। कुशल महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित होने वाली जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है।

 

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गुणवत्ता पर निगरानी प्राथमिकता

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। गांव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता की जांच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है।

एफटीके से परीक्षण किए गए जल नमूनों का आंकड़ा

  • क्रम संख्या        वित्तीय वर्ष        एफटीके से परीक्षण किए गए जल नमूनों की संख्या
    1                    2026             23,34,754
    2                    2025-26             5,51,221
    3                    2024-25             38,19,440
    4                    2023-24             36,68,743
    5                    2022-23             39,47,102
  • कुल 1,43,21,260

नोट: 2026-27 के आंकड़े खबर लिखे जाने तक के हैं।


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