गाजियाबाद पुलिस ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक संगठित मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाकर उनके नवजात बच्चों का सौदा करता था और उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों में बेच देता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क दिल्ली-NCR से लेकर दक्षिण भारत तक फैला हुआ था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मई में जन्मी एक बच्ची के अपहरण की जांच शुरू हुई। पुलिस के अनुसार, बच्ची के माता-पिता पहले आर्थिक तंगी के कारण उसे बेचने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन जन्म के बाद उनका मन बदल गया। इसके बावजूद गिरोह के सदस्यों ने बच्ची का पीछा नहीं छोड़ा और जन्म के 11 दिन बाद उसे घर से अगवा कर लिया।
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11 दिन की बच्ची का किया अपहरण
पुलिस के मुताबिक, पूजा नाम की महिला ने 26 मई को बच्ची का अपहरण कर उसे अपने साथी मनोज के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर ट्रॉनिका सिटी थाना पुलिस ने स्थानीय खुफिया तंत्र और CCTV फुटेज की मदद से बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस ने पूजा और मनोज समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में तरन्नुम, अनिल लकड़ा और करुण को भी पकड़ा गया।
गरीब परिवारों को बनाते थे निशाना
पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह ऐसे गरीब परिवारों को निशाना बनाता था, जहां जल्द ही बच्चे का जन्म होने वाला होता था। ये लोग परिवारों को पैसों का लालच देकर नवजात बच्चों का सौदा करवा लेते थे। इसके बाद बच्चों को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों को बेच दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक नवजात बच्ची को आंध्र प्रदेश के एक दंपती को सौंपने की तैयारी भी चल रही थी।
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नकली नोटों से करते थे भुगतान
पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क में रहते थे और काम पूरा होने के बाद चैट डिलीट कर देते थे। बच्चों के बदले परिवारों को असली नोटों के साथ नकली नोट भी दिए जाते थे। जब तक परिवारों को इसकी जानकारी मिलती, आरोपी बच्चे को लेकर फरार हो चुके होते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2,500 रुपये के नकली नोट और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।