उत्तर प्रदेश के नोएडा में धड़ल्ले से गांजा की सप्लाई हो रही है। डीलर शहर में गांजा बेचने के लिए नई-नई तरकीबें इजाद कर रहे हैं। दरअसल, नोएडा पुलिस ने एक ऐसे ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देखने में किसी ई-कॉमर्स डिलीवरी जैसा लगता था लेकिन अंदर से पूरा मॉडल अवैध गांजा सप्लाई पर टिका था। यह गैंग गांजा को ऑनलाइन शॉपिंग पैकेज की तरह पैक करके कूरियर ऐप के जरिए लोगों को घरों में डिलीवर कर रहा था। पुलिस ने सेक्टर-113 क्षेत्र में छापेमारी करके इस गिरोह के सरगना और दो साथियों को गिरफ्तार किया है।
गांजा गैंग के लोग पहले ऑफलाइन कस्टमर्स ढूंढते थे, फिर फोन पर ट्रांजैक्शन करके UPI ऐप से पेमेंट लेते थे। डीलर कूरियर ऐप से लोगों को होम-डिलीवरी भी करते थे। पुलिस ने बताया कि नोएडा में पकड़े गए गांजा गैंग नई तरकीबें अपनाकर लोगों तक अपना माल पहुंचा रहे हैं।
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करीने से छिपाया जाता था गांजा
जांच में सामने आया है कि गांजे को पॉपुलर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के पैकेज के तौर पर बड़े करीने से छिपाया जाता था, जिसमें उनके बॉक्स और लोगो वाले टेप भी होते थे। आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गैंग ने गैर-कानूनी गांजे के साथ कानूनी मान्यता प्राप्त सामान के नकली बिल बनाए थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पूरा कारोबार सुनियोजित तरीके से चल रहा था। सबसे पहले गैंग के डीलर कॉलेजों और कॉर्पोरेट दफ्तरों के आसपास संभावित ग्राहकों से संपर्क करते थे। दोनों के बीच भरोसा बनते ही एक दूसरे के नंबर शेयर किए जाते थे। इसके बाद और आगे की बातचीत फोन पर होती थी।
डिजिटल मोड में होता था पेमेंट
इस गिरोह में गांजे का ऑर्डर लेने से लेकर पेमेंट तक सब कुछ डिजिटल होता था। ग्राहक डीलरों को अपनी लोकेशन शेयर करते थे और फिर डिलीवरी किसी ऐप जैसे पोर्टर पर बुक की जाती। पुलिस ने शनिवार, 29 नवंबर को तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
दिलचस्प पैकेजिंग करके डिलीवरी
पुलिस ने बताया, गांजा गैंग ई-कॉमर्स कंपनियों की तरह दिखने वाले बॉक्स और टेप का इस्तेमाल करता थे। इन बॉक्स पर लोकप्रिय ब्रांड्स जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट आदि के लुक की नकल होती थी। इसके साथ ही फर्जी बिल भी तैयार किए जाते थे ताकि पार्सल बिल्कुल वैध सामान जैसा लगे। इस तरह अगर रास्ते में किसी वजह से पैकेज रोका जाए, तो पकड़े जाने जाने पर डिलीवरी बॉय होता, जो असल माल के बारे में जानता भी नहीं था। इसी 'डिकॉय' मॉडल से गिरोह अपने आप को बचाए रखता था।
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नोएडा पुलिस ने छापेमारी में गिरोह के पास से 10.1 किलो गांजा बरामद किया है। गांजे की बाजार में कीमत लगभग 30 लाख रुपये है। जब्त किए गए गांजे में OG, मैंगो और शिलॉन्ग जैसे ब्रांड नामों से बेचे जाने वाले स्ट्रेन शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, ये सामान्य गांजे से पांच गुना महंगा बिकता है।
गैंग के तीन मास्टरमाइंड गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गैंग का मास्टरमाइंड कन्नौज का रहने वाला योगेंद्र प्रताप सिंह, नालंदा का सूरज उर्फ रुद्र और हरदोई का रहने वाला शिवकेश त्रिपाठी शामिल हैं। पुलिस ने बताया है कि योगेंद्र सिंह पहले नोएडा में ही एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। नोएडा में ड्रग्स के बढ़ते क्रेज को देखकर उसने खुद सप्लाई का काम शुरू किया और पांच साल में दिल्ली-NCR में बड़ा नेटवर्क बना लिया। वह पहले भी NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर था।
पुलिस ने गिरोह के लोगों से पूछताछ के बाद खुलासा किया है कि यह गैंग गांजा ओडिशा, आंध्र प्रदेश, नेपाल और मेघालय के शिलांग से मंगाता था। फिलहाल सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और पुलिस नेटवर्क के बारे में विस्तार से जांच कर रही है।