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UP में धान पर बारिश की मार, लाखों हेक्टेयर धान की फसल हुई बर्बाद

UP में सितंबर में हुई भारी बरसात में 56 जिलोें में कई लाख हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार ने सभी जिलों के डीएम को फसलों के नुकसान का सर्वे कराने का आदेश दिया है। पढ़े रिपोर्ट

Paddy crop spread across the field

कन्नौज में खेत में बिछी धान की फसल, Photo Credit : Social Media

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उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कटाई के लिए तैयार धान की फसल कई जिलों में खेतों में बिछ गई है जबकि निचले इलाकों में जलभराव से फसल के सड़ने और दाना खराब होने का खतरा बढ़ गया है। धान के साथ गन्ना, तिल, उड़द, सब्जियों और दूसरी खरीफ फसलों पर भी बारिश की मार पड़ी है। प्रदेश में इस खरीफ सीजन में करीब 69 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था। सरकार ने लक्ष्य के मुताबिक, उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया था।

कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में धान का क्षेत्रफल करीब 69.45 लाख हेक्टेयर था। खरीफ 2026 में धान का रकबा करीब 69 लाख हेक्टेयर रखने का लक्ष्य बनाया गया था। सरकार ने कुल खरीफ क्षेत्रफल 110.65 लाख हेक्टेयर और कुल खरीफ उत्पादन 302.62 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है। धान के उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख टन रखा गया है।अब सितंबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश ने इसी तैयार होती फसल को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

 

कई जगह धान की बालियां निकल चुकी थीं और फसल कटाई के करीब पहुंच गई थी। तेज हवा के साथ बारिश होने से पौधे खेतों में गिर गए। जहां पानी कई घंटे या दिन तक जमा रहा, वहां गिरी हुई फसल के सड़ने, दाने के काले पड़ने और गुणवत्ता खराब होने का खतरा है।

सबसे ज्यादा असर वाले इलाके

25 से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 7.6 मिलीमीटर होती है। यानी इस अवधि में बारिश सामान्य से करीब 775 प्रतिशत अधिक रही। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। फर्रुखाबाद, कन्नौज, शाहजहांपुर, हमीरपुर और महोबा में बारिश सामान्य से कई हजार प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। इन जिलों के अलावा सुल्तानपुर, लखनऊ, बरेली, अलीगढ़, आंबेडकरनगर और शाहजहांपुर समेत कई जिलों से धान की फसल गिरने, खेतों में पानी भरने और दूसरी फसलों को नुकसान की रिपोर्ट सामने आई है।

 

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सुल्तानपुर में 28 हजार हेक्टेयर धान प्रभावित

सुल्तानपुर में भारी बारिश और तेज हवा से धान की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। जिले में करीब 28 हजार हेक्टेयर धान की फसल खेतों में गिर गई है। फसल के गिरने से उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।राजधानी लखनऊ में भी बारिश का असर धान की फसल पर पड़ा है। खेतों में पानी भरने से करीब 1,500 हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद होने की सूचना सामने आई है।

 

कई खेतों में पानी भर जाने से फसल के लंबे समय तक डूबे रहने का खतरा बना हुआ है।बरेली में इस साल धान के लिए 1,58,592 हेक्टेयर का लक्ष्य था और करीब 1,58,627 हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई। बारिश और तेज हवा से कटाई के करीब पहुंच चुकी धान की फसल खेतों में गिर गई है। गन्ने को भी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने फसल क्षति का सर्वे कराने के लिए विकासखंड स्तर पर विशेष टीमें लगाने के निर्देश दिए हैं।

शाहजहांपुर में 2.18 लाख हेक्टेयर धान

शाहजहांपुर में इस बार करीब 2,18,760 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। लगातार बारिश और आंधी के कारण कई इलाकों में धान और गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। जिला स्तर पर बारिश रुकने के बाद व्यापक सर्वे कराने की तैयारी है, ताकि वास्तविक नुकसान का क्षेत्रफल सामने आ सके। अंबेडकरनगर में खरीफ सीजन में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। इसमें लगभग 15 हजार हेक्टेयर में अगेती धान था। बारिश और तेज हवा से अगेती धान की फसल खेतों में गिर गई। इसके अलावा गन्ने और केले की फसल को भी नुकसान हुआ है। जिले में कृषि, राजस्व विभाग और फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की टीमें नुकसान का सर्वे कर रही हैं।

किसानों ने मांगा मुआवजा

बारिश और बाढ़ से फसल नुकसान को लेकर प्रदेश में पहले से बड़ी संख्या में किसान मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके हैं। 16 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3,61,120 आवेदन फसल क्षति के संबंध में मिले थे। इनमें 3,04,028 आवेदक पात्र पाए गए थे, लेकिन उस समय तक सिर्फ 45,828 आवेदनों का सर्वे पूरा हुआ था। 70 हजार से अधिक आवेदनों पर सर्वे शुरू होना बाकी था।इस आंकड़े को सितंबर के 25-27 तारीख वाले नए बारिश नुकसान से अलग समझना जरूरी है। नए नुकसान का सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हालिया बारिश से कितने अतिरिक्त हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई है।

 

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्तमान खरीफ सीजन में प्रदेश के 23.58 लाख किसानों को बीमित किया गया है। पिछले खरीफ सीजन में 20.63 लाख किसानों का बीमा हुआ था और 7.31 लाख किसानों को 812.76 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है। हालिया बारिश से बीमित किसानों के दावों का सर्वे और प्रक्रिया भी नुकसान के आकलन के साथ आगे बढ़ेगी। सितंबर की बारिश ने धान की कटाई से ठीक पहले किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है।

 

फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित खेतों का वास्तविक क्षेत्रफल तय करना है। जिलों से सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह साफ होगा कि हालिया बारिश से कितने हेक्टेयर धान और अन्य खरीफ फसलें खराब हुईं और कितने किसानों को राहत या कृषि निवेश अनुदान दिया जाना है।

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