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ACP में देरी पर लगी याचिका, हाई कोर्ट ने लंबित सभी मामलों का मांग लिया ब्योरा

शिक्षा विभाग में कर्मचारियों को उचित समयावधि में ACP का लाभ नहीं मिला तो खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा। अब हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हलफनामा दाखिल नहीं किया तो लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के वेतन से याचिकाकर्ता को 50 हजार रुपये का हजार्ना दिया जाएगा।

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। (Photo Credit - Social Media & AI Generated)

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कर्मचारियों को मिलने वाले सुनिश्चित कैरियर प्रगति (ACP) के उचित समयावधि में लाभ न मिलने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। शिक्षा विभाग में ACP के लंबित पड़े इन मामलों पर हरियाणा सरकार ने कोर्ट में जो जवाब दायर किया, उसे हाईकोर्ट ने असंतोषजनक और टालमटोल वाला करार दिया है। 

 

बता दें कि जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत शिक्षा विभाग के तीनों निदेशालयों (प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा) में लंबित पड़े सभी ACP मामलों का पूरा ब्योरा और हर केस में देरी का कारण हाईकोर्ट को बताना होगा। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। हाईकोर्ट ने कहा है कि निदेर्शों के अनुपालन में सही हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के वेतन से याचिकाकर्ता को 50 हजार रुपए का हजार्ना दिया जाएगा। 

 

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महिला की याचिका पर कार्ट का संज्ञान

बता दें कि याचिकाकर्ता स्वाति देवी की हाईकार्ट में याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं। स्वाति देवी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर बताया था कि शिक्षा विभाग में उसकी नियुक्ति 17 दिसंबर 2008 को TGT गृह विज्ञान के पद पर हुई थी। 1 जनवरी 2017 से पहला ACP लाभ मिला। एक जनवरी 2025 से दूसरे ACP को मंजूरी देने में ही 16 महीने लगा दिए गए।

 

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सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट का किया रुख

स्वाति ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका में बताया था कि 22 जून और 2 जुलाई 2026 को विभाग को इस संबंध में पत्र भी लिखा था, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई तो उसे कोर्ट की तरफ रुख करना पड़ा। अब हाईकोर्ट ने इस संबंध में हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव को निर्देश जारी किए हैं।

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