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पंजाब: पुरानी पेंशन का वादा पूरा नहीं किया तो AAP सरकार पर कितना भारी पडे़गा?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने अभी तक पुरानी पेंशन स्कीम को लागू नहीं किया है। विपक्ष इस मुद्दे को मुखरता से उठा रहा है।

Bhagwant Mann

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। Photo Credit: PTI

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पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों को लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में विपक्ष अब आम आदमी पार्टी (AAP) को पुरानी पेंशन योजना पर घेरने की तैयारी कर रहा है। आम आदमी पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान कर्मचारियों से वादा किया था कि पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य में पुरानी पेंशन स्कीम को लागू किया जाएगा। हालांकि, अभी तक पंजाब की भगवंत मान सरकार अपना यह वादा पूरा नहीं कर पाई है। 

 

2022 में आम आदमी पार्टी को बंपर जीत मिली थी और भगवंत मान सीएम बने थे। इसके कुछ महीनों बाद ही कैबिनेट ने पुरानी पेंशन योजना को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी थी और इसका जमकर प्रचार भी किया था। कर्मचारियों ने इसे एक बड़ी राहत के तौर पर देखा था लेकिन करीब चार साल बाद भी यह फैसला पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं हो पाया है। इसी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष भी इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा है। 

 

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2022 में मिला था जनसमर्थन

2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का वादा किया था। आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी वादों में कहा था कि सत्ता में आने पर 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाएगी।  नई पेंशन योजना (NPS) को लेकर कर्मचारियों में लंबे समय से नाराजगी थी और AAP ने इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने भी पुरानी पेंशन लागू करने का वादा किया था। इसका फायदा भी कांग्रेस को हुआ था। 

कैबिनेट ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

भगवंत मान सरकार ने  सरकार गठन के कुछ महीने बाद ही 21 अक्टूबर 2022 को कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन योजना को इन-प्रिंसिपल यानी सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे कर्मचारियों के लिए दीवाली का तोहफा बताया था। बाद में 18 नवंबर 2022 को सरकार ने OPS लागू करने की अधिसूचना भी जारी की। उस समय सरकार ने कहा था कि कर्मचारियों को पुरानी और नई पेंशन योजना में विकल्प भी दिया जाएगा। 

क्यों अटक गई पुरानी पेंशन?

घोषणा और अधिसूचना जारी होने के बावजूद सरकार अब तक OPS को पूरी तरह लागू नहीं कर पाई है। राज्य सरकार का कहना है कि योजना के वित्तीय प्रभाव और कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। हाल के महीनों में पंजाब सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाकर इसके वित्तीय असर का आकलन कराने की बात भी कही है। पंजाब सरकार पहले की कर्ज के बोझ में दबी हुई है और कई बार कर्ज ले चुकी है। इसलिए ऐसी स्थिति में OPS लागू करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। 

 

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कर्मचारी कर रहे विरोध

सरकार की ओर से लगातार की जा रही देरी के कारण अब कर्मचारी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार ने चुनावी वादा पूरा नहीं किया। उनका कहना है कि अधिसूचना केवल कागजों तक सीमित है और कर्मचारियों को अब भी नई पेंशन व्यवस्था के तहत ही रखा गया है। इसी मुद्दे पर राज्यभर में कई बार प्रदर्शन और धरने हो चुके हैं। इसके साथ ही अब चुनाव से पहले एक बार फिर से मुद्दा उठाया जाने लगा है। कांग्रेस पार्टी मुखरता से इस मु्द्दे को उठा रहे है और कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने तो सरकार को चुनौती भी दे दी है। 

कितने लोग होंगे प्रभावित?

पंजाब सरकार के 2022 के आधिकारिक फैसले के अनुसार, करीब 1.75 लाख सरकारी कर्मचारी ऐसे हैं जो साल 2004 के बाद भर्ती हुए और नई पेंशन योजना (NPS) के दायरे में आते हैं। इन्हीं कर्मचारियों को OPS बहाल होने का सबसे अधिक लाभ मिलेगा। राज्य में पहले से लगभग 1.26 लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, NPS के तहत पंजाब के कर्मचारियों की पेंशन निधि में करीब 16,746 करोड़ रुपये जमा हैं। वहीं विभिन्न रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि OPS लागू करने पर राज्य पर करीब 18,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इसी के चलते सरकार इस फैसले को लागू नहीं कर पा रही है। 

AAP को हो सकता है राजनीतिक नुकसान?

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का पंजाब की राजनीति में बड़ा प्रभाव माना जाता है। सरकार के अपने आंकड़े ही बता रहे हैं कि इस योजना से 1.75 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को लाभ होगा। ऐसे में इन कर्मचारियों के साथ-साथ इनके परिवारों को भी सीधा इस योजना का लाभ मिल सकता है। अगर एक परिवार में 2 से 3 मतदाता भी शामिल किए जाएं तो यह एक बड़े मतदाता वर्ग को प्रभावित करता है। कर्मचारी संगठन लगातार कह रहे हैं कि सरकार ने चुनाव से पहले वादा किया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। कर्मचारी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। डीए समेत कई मोर्चों पर पहले से आम आदमी पार्टी की सरकार पहले ही बैकफुट पर नजर आ रही है। ऐसे में पुरानी पेंशन को मुद्दा भी पार्टी और सरकार को अब परेशान कर सकता है। अगर आने वाले समय में भी OPS लागू नहीं होती, तो यह AAP के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकता है।

 

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इन राज्यों में भी बड़ा मुद्दा 

कांग्रेस पार्टी ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया है। इसके साथ ही कई राज्यों में इन मुद्दे पर चुनाव भी लड़े हैं। साल 2022 में कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल प्रदेश के चुनाव में इस मुद्दे को मुखरता से उठाया था और सरकार बनने के बाद वादा पूरा भी किया। इसेक अलावा राजस्थान, छत्तीसगढड और झारखंड में सरकार यह फैसले ले चुकी है। ऐसे में इन चुनावों में कांग्रेस पंजाब में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकती है। 

 

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