हरियाणा के अंबाला सिटी नगर निगम चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान सोमवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व पार्षद पुष्पेंद्र कुमार उर्फ हरीश शर्मा का नामांकन रद्द कर दिया गया। नामांकन खारिज होने की खबर मिलते ही हरीश शर्मा चुनाव कार्यालय के बाहर ही फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने सत्ता पक्ष और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
नामांकन रद्द होने के बाद हरीश शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज पूरे किए थे। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी विभागों से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' था और कोई बकाया नहीं था लेकिन इसके बावजूद तकनीकी आधार पर उनका पर्चा खारिज कर दिया गया।
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हरीश शर्मा के अनुसार, बिजली विभाग की ओर से गलती करते हुए किसी अन्य व्यक्ति के मीटर नंबर को उनके नाम से जोड़ दिया गया। इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि वह इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
लगाए खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप
भावुक होते हुए हरीश शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछले कई दिनों से उन्हें खरीदने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, 'जब मैं नहीं बिका, तो मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया।' इस दौरान उनके कवरिंग उम्मीदवार विजय कुमार का नामांकन भी रद्द कर दिया गया, जिससे मामला और गरमा गया है।
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कांग्रेस को भी लगा झटका
नामांकन जांच के दौरान कांग्रेस को भी झटका लगा है। वार्ड-3 से उम्मीदवार संजीव शर्मा का नामांकन NDPS एक्ट के एक मामले में 10 साल की सजा के कारण रद्द कर दिया गया। हालांकि यह मामला फिलहाल हाई कोर्ट में लंबित है। अब कांग्रेस ने उनकी जगह उनकी पत्नी प्रियंका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जिनका नामांकन वैध पाया गया है।