बिहार के बहुचर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल ने इस मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार घोटाले के असली जिम्मेदारों को बचाने और मामले को सीमित दायरे में रखने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि अब तक जो कार्रवाई हुई है, वह केवल निचले स्तर के लोगों तक सिमटकर रह गई है, जबकि बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि रिशु श्री टेंडर घोटाला कोई साधारण वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी ठेकों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां और सरकार उन लोगों तक पहुंचने से बच रही हैं, जिनकी भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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राजद प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में एक दर्जन से अधिक ऐसे अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, जिन पर विभिन्न स्तरों पर संरक्षण देने और घोटाले की प्रक्रिया को सुगम बनाने के आरोप लगते रहे हैं। इसके बावजूद न तो उनकी जवाबदेही तय की जा रही है और न ही उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है तो फिर बड़े अधिकारियों को पूछताछ और कार्रवाई के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है।
हजारों करोड़ के खेल में सिर्फ मोहरों पर कार्रवाई
एजाज अहमद ने दावा किया कि रिशु श्री का प्रभाव केवल टेंडर हासिल करने तक सीमित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तक उसके प्रभाव से प्रभावित होती थी। अगर यह सब जांच में सामने आ चुका है तो फिर उन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, जिन्होंने उसे संरक्षण दिया या उसके प्रभाव को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले में यदि केवल कुछ कर्मचारियों, बिचौलियों या छोटे स्तर के लोगों को गिरफ्तार कर दिया जाए और बड़े पदों पर बैठे लोगों को बचा लिया जाए तो यह न्याय की भावना के साथ खिलवाड़ होगा। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर घोटाले के पीछे मौजूद प्रभावशाली चेहरे कौन हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
सरकार पर लीपापोती का आरोप
राजद प्रवक्ता ने सरकार पर मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने और जांच को भटकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा कार्रवाई से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जांच अभी तक उन लोगों तक नहीं पहुंची है जो सत्ता और प्रशासनिक तंत्र में प्रभाव रखते हैं।
उनके अनुसार, अगर सरकार सचमुच भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है तो उसे बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के सभी आरोपित अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल छोटे लोगों की गिरफ्तारी कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।
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बड़ी मछलियों तक पहुंचे जांच
एजाज अहमद ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए और जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने दिया जाए। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तभी जनता का विश्वास जांच प्रक्रिया और शासन व्यवस्था पर कायम रह सकेगा। राजद का कहना है कि जब तक घोटाले के कथित मास्टरमाइंड, संरक्षण देने वाले अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी।