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उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा दांव, आलोक सिंह फिर से बने RLM बिहार प्रदेश अध्यक्ष

उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इस बीच उनकी पार्टी ने बिहार में आलोक सिंह को एक बार फिर से अपना प्रदेश अध्यक्ष चुना है।

upendra kushwaha and alok singh

उपेंद्र कुशवाहा के साथ आलोक सिंह, Photo Credit: RLM

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बिहार की राजनीति में संगठनात्मक मजबूती की होड़ तेज हो गई है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपने संगठन को नया आकार देते हुए कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने आलोक सिंह को एक बार फिर बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन विस्तार की रणनीति अब और आक्रामक रूप लेने वाली है। रोचक बात है कि यह सब तब हो रहा है जब विधान परिषद की एक सीट को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और उनके बेटे दीपक प्रकाश मुश्किल में दिख रहे हैं।

 

संगठनात्मक कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चुनावी प्रक्रिया का भी समापन हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि दोनों प्रमुख दावेदारों ने मंच से ही अंतिम निर्णय का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को सौंप दिया। इसके बाद कुशवाहा ने आलोक सिंह के नाम की घोषणा की, जिसका कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियों और उत्साह के साथ स्वागत किया।

 

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संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में पार्टी ने कई नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है जबकि हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नई टीम संगठन में नई ऊर्जा और गति लेकर आएगी।


22 लाख से ज्यादा सदस्यों का दावा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता और नैतिक राजनीति के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का संगठन तेजी से गांव, पंचायत और बूथ स्तर तक फैल रहा है और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से संगठन को नई ताकत मिली है।

 

कुशवाहा ने बताया कि बिहार के 32 जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। उन्होंने इसे पार्टी की संगठनात्मक परिपक्वता का प्रमाण बताते हुए कहा कि शेष जिलों में भी जल्द प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान पार्टी ने अपने सदस्यता अभियान की सफलता का भी दावा किया। उपेंद्र कुशवाहा के अनुसार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा की सदस्य संख्या 22 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। पार्टी इसे बिहार में बढ़ते जनाधार और राजनीतिक स्वीकार्यता का संकेत मान रही है।

 

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठनात्मक पुनर्गठन और सदस्यता विस्तार के जरिए राष्ट्रीय लोक मोर्चा आगामी चुनावी समीकरणों में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति नए गठबंधनों और बदलते समीकरणों के दौर से गुजर रही है, आरएलएम का यह कदम आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

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