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'सुशासन नहीं, डर का शासन', CM सम्राट चौधरी के बयान पर रोहिणी का तंज

बिहार में आयोजित एआई समिट 2026 के मंच पर सीएम सम्राट चौधरी ने सुशासन और कानून व्यवस्था का जिक्र किया तो उस पर रोहिणी आचार्य ने तंज कंसा।

Bihar CM Samrat Chaudhary and Rohini Acharya

बिहार सीएम सम्राट चौधरी और रोहिणी आचार्य। (Photo Credit: PTI/Social Media)

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पटना में आयोजित एआई समिट 2026 अब तकनीक से ज्यादा सियासत की वजह से चर्चा में आ गया है। सम्राट चौधरी के एक बयान पर रोहिणी आचार्य ने जोरदार पलटवार करते हुए बिहार सरकार की सुशासन नीति पर कई सवाल खड़े कर दिए। ऊर्जा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीकी विकास और प्रशासनिक सुधारों पर बात की, लेकिन भाषण के दौरान कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।

सुशासन पुलिस के भरोसे नहीं चलता

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा कि सरकार ने सुशासन की अवधारणा को सीमित कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए लिखा कि जनता का विश्वास खोकर केवल पुलिसिया सख्ती के दम पर शासन नहीं चलाया जा सकता।

 

उन्होंने कहा कि जहां हर समस्या का जवाब पुलिस हो, वहां सुशासन नहीं बल्कि डर का शासन होता है। रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने के लिए लाठीचार्ज, मुकदमे और पुलिसिया कार्रवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

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युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर भी घेरा

राजद नेता ने सरकार को रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी घेरते हुए कहा कि लीक-प्रूफ शिक्षा व्यवस्था के बिना सुशासन अधूरा है। रोजगार और पारदर्शिता के बिना विकास का दावा खोखला है। सवाल पूछने वाले युवाओं को डराना लोकतंत्र को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि असली सुशासन वही है, जहां युवा सरकार से सवाल पूछते हुए खुद को सुरक्षित महसूस करें।

एआई समिट से सियासी संग्राम तक

दिलचस्प बात यह है कि जिस मंच पर बिहार के डिजिटल भविष्य और एआई आधारित विकास मॉडल की चर्चा होनी थी, वही मंच अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। विपक्ष इस मुद्दे को पुलिसिया शासन बनाम जनविश्वास की बहस में बदलने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था को अपनी प्राथमिक उपलब्धि बता रही है।

 

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बिहार की राजनीति में नया नैरेटिव?

बिहार में सुशासन लंबे समय से राजनीतिक ब्रांडिंग का हिस्सा रहा है, लेकिन अब विपक्ष इसे रोजगार, शिक्षा, युवाओं पर कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों से जोड़कर नए तरीके से चुनौती देने में जुटा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है, खासकर तब जब राज्य में तकनीक, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हों।


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