केरल के पतनमथिट्टा में कंज्यूमर कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उसे बीयर की बोतल खरीदने पर मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) से 10 रुपये ज्यादा चुकाने पड़े। कोर्ट ने इस मामले में सरकारी शराब निगम यानी केरल स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन (KSBC) के खिलाफ फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार, केरल सरकारी शराब निगम को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा 30 दिनों के भीतर देना होगा। सुनवाई के दौरान दुकानदार ने कई तर्क दिए लेकिन कोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया।
इस ग्राहक ने कोर्ट जाने से पहले सरकारी शराब निगम का विरोध भी किया था। शिकायत के अनुसार, उसने सरकारी शराब निगम की दुकान से 650 मिलीलीटर की बीयर खरीदी थी, जिस पर 170 रुपये कीमत छपी हुई थी। इसके बावजूद दुकानदार ने उससे 180 रुपये वसूले। ग्राहक का आरोप है कि जब उसने अतिरिक्त राशि को लेकर सवाल उठाया तो दुकान के कर्मचारियों ने उससे बहस और बदतमीजी की थी। इसके बाद उसने 3 जून को कंज्यूमर कोर्ट में मुआवजे की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई।
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कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
कंज्यूमर कोर्ट ने जब सरकारी शराब निगम के कर्मचारियों से ज्यादा कीमत वसूलने का कारण पूछा, तो निगम की ओर से कहा गया कि सोशल सिक्योरिटी सेस लागू होने की वजह से शराब की कीमतें बढ़ाई गई थीं। हालांकि, बीयर निर्माता कंपनी ने गोदामों में रखी बोतलों पर MRP में कोई बदलाव नहीं किया था, इसलिए बोतल पर पुरानी कीमत ही दर्ज थी।
इस तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकारी शराब निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि निगम ने नियमों का उल्लंघन किया है। नियमों के अनुसार, किसी भी उपभोक्ता से पैकेट या बोतल पर छपे MRP से अधिक कीमत नहीं वसूली जा सकती।
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कोर्ट के फैसले के मुताबिक, ग्राहक को ज्यादा रुपये चुकाना पड़ा था। साथ ही कर्मचारियों के व्यवहार के वजह से मानसिक तनाव झेलना पड़ा। इस वजह से उसे 15,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। इसके अलावा उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के लिए 10,000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया। इस तरह केरल स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन को कुल 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।