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'अभी दो साल बाकी हैं', दिल्ली की जगह अचानक जयपुर में उतरा सिद्धारमैया का विमान

राष्ट्रीय राजनीति में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं प्रदेश की सियासत में बना रहूंगा। जनता ने मुझे साल साल के लिए चुना है। अभी दो साल बाकी हैं। इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने यह बात अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

Siddaramaiah

सिद्धारमैया। (Photo Credit: PTI)

इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया, उनके बेटे यतींद्र और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत अन्य नेताओं को ले जाने वाला जहाज नई दिल्ली की जगह जयपुर में उतरा। कर्नाटक सीएम ऑफिस ने बताया कि खराब मौसम के कारण विमान को जयपुर में उतारना पड़ा। विमान में सिद्धारमैया, उनके एमएलसी बेटे यतींद्र, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरेजवाला, मंत्री केजे जॉर्ज, बैरती सुरेश, कानूनी सलाहकार पोन्नन्ना और कांग्रेस सचिव अभिषेक दत्त सवार थे। 

 

उधर, सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन की खबर है। राजधानी बेंगलुरु में स्थिति सिद्धरमैया के आधिकारिक आवास 'कावेरी' के बाहर उनके समर्थक जुटे। सभी ने इस्तीफा न देने की अपील की। राजभवन जाते वक्त भी कुछ समर्थकों ने उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की। 

 

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यादगिर और हुबली में बड़े प्रदर्शन

शिवमोगा शहर में लोगों ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया। जमकर नारेबाजी भी की। यहां के शिवप्पा नायक सर्कल पर कुरुबा समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। कर्नाटक प्रदेश कुरुबारा संघ ने यादगिर जिले में कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने जाम लगाने का भी प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने दखल देकर सभी को तितर-बितर किया। कलबुर्गी जिले में कुरुबा समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ नारेबाजी की। 

 

हुबली में 'अहिंदा' नेताओं ने सिद्धरमैया के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। डीके शिवकुमार, राहुल गांधी और खरगे के खिलाफ खूब नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सिद्धारमैया के साथ अन्याय हुआ है। 

समर्थक ने किया आत्महत्या का प्रयास 

यादगिर जिले में राजकुमार गनीर नाम का शख्स सिद्धारमैया के समर्थन में मौन प्रदर्शन शुरू किया है। वहीं भीमू नाम के एक प्रदर्शनकारी ने जहरीला पदार्थ पीने का प्रयास किया। हालांकि वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उससे शीशी छीन ली।

 

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'मैं स्वेच्छा से पद छोड़ रहा हूं'

इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस को संबोधित किया और कहा कि मैं अपनी अंतरात्मा से पद छोड़ रहा हूं। यह भी बताया कि हाईकमान ने राज्यसभा भेजने की पेशकश की, लेकिन विनम्रतापूर्वक इसे अस्वीकार कर दिया। सिद्धारमैया ने स्वेच्छा से पद छोड़ने की बात कही।

अभी दो साल बाकी हैं: सिद्धारमैया

उन्होंने कहा कि कभी सत्ता और धन के पीछे नहीं भागा। 50 साल का राजनीतिक करियर एक खुली किताब की तरह है। सिद्धारमैया ने कहा कि मैंने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया है। मुझे राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं कर्नाटक की राजनीति में बना रहूंगा। जनता ने मुझे पांच साल के लिए चुना है। अभी दो साल बाकी हैं। तब तक मैं कर्नाटक की जनता और अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के लिए काम करूंगा।

 

 


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