logo

ट्रेंडिंग:

पहले चुप्पी, फिर सफाई, सिंगूर में इंडस्ट्री के दावों से बच क्यों रही बीजेपी?

सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों की वजह से ममता बनर्जी पर बीजेपी आरोप लगाती रही है कि उनकी वजह से पश्चिम बंगाल में उद्योग हाशिए पर हैं। अब एक बार फिर उद्योगों को लेकर सियासत छिड़ी है।

Narendra Modi

सिंगूर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Photo Credit: PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के सिंगूर दौरे पर थे। उन्होंने एक चुनावी जनसभा भी की लेकिन सिंगूर को औद्योगिक तोहफा देने की बात कहने से बचते नजर आए। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सिंगूर के औद्योगीकरण का जिक्र न होने की वजह से यह चर्चा छिड़ी कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी यहां के विकास से करता रही है। हंगामा इतना बढ़ा कि पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को दावा किया कि सिंगुर की उसी जमीन पर, जहां कभी टाटा मोटर्स ने अपनी छोटी कार फैक्ट्री के लिए अधिग्रहण किया था, अब एक नई ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री स्थापित की जाएगी। 

समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि एक अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल हब विकसित किया जाएगा। यह सिंगूर के लोगों को और बीजेपी का सपना है।समिक भट्टाचार्य का यह बयान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के एक दिन बाद आया है। पीएम मोदी ने औद्योगीकरण पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगुर रैली में कानून-व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया लेकिन सिंगूर के औद्योगीकरण का जिक्र ही नहीं किया। उन्होंने यह इशारा जरूर किया कि पश्चिम बंगाल में निवेश लाने के लिए ममता सरकार से मुक्ति चाहिए।

यह भी पढ़ें: बदहाली, बेबसी और हक की आस, बंगाल के चाय बागान मजदूर क्या चाहते हैं?

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
टीएमसी का छोटे से छोटा नेता बंगाल का माईबाप समझने लगा है। हुगली को इन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले के लिए बदनाम किया है। बीजेपी इन्हें सजा दिलाएगी। आपको एक बात याद रखनी है बंगाल में निवेश तभी आएगा। जब यहां माफिया, दंगाइयों को हटाया जाएगा। यहां हंगामा करने वालों को छूट मिली है, सिंडिकेट चल रहे हैं। इन्हें बीजेपी सरकार खत्म करेगी। ये भी मोदी की गारंटी है। 

सिंगूर में पीएम मोदी की रैली में शामिल ग्रामीणों के कुछ इंटरव्यू चर्चा में हैं। उनका कहना है कि वे इस उम्मीद में थे कि प्रधानमंत्री की तरफ से निवेश और उद्योग का कुछ मजबूत वादा मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार ने सिंगूर आंदोलन को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना तो की लेकिन पीएम मोदी ने चुप रहे। नौबत यहां तक आ गई समिक भट्टाचार्य को यह कहना पड़ा कि पीएम मोदी की मौजूदगी ही औद्योगीकरण का संदेश है।

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में 'रेड पॉलिटिक्स' को कैसे भुनाती हैं ममता बनर्जी?

सिंगूर के औद्योगीकरण के नाम से क्यों बचती है BJP?

  • सिंगूर आंदोलन ने ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में स्थापित किया था। ग्रामीण मतदाताओं ने ममता बनर्जी की 'मां, माटी और मानुष' नीति पर इतना भरोसा जताया कि अब तक कोई दूसरी पार्टी अस्तित्व में नहीं आ सकी। ममता बनर्जी ने कृषि बनाम उद्योग का 'कृषि बनाम उद्योग' की इस लड़ाई में ममता बनर्जी ने 'मां, माटी, मानुष' के नारे के साथ खुद को किसानों की असली हिमायती बताया। बीजेपी का ही एक धड़ा मानता है कि अगर इस मुद्दे को ज्यादा कुरेदेंगे तो ममता बनर्जी को एक बार फिर मौका मिलेगा। वह पहले ही बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के कब्जे का आरोप लगाती हैं। 

  • पश्चिम बंगाल, देश के कृषि प्रधान राज्यों में से एक है। PRS लेजिसलेटिव रिसर्च के आकंड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में कृषि का योगदान राज्य की जीएसडीपी में 20 फीसदी से ज्यादा है। सिंगूर आंदोलन के बाद किसानों के मन में जमीन अधिग्रहण और उद्योग दोनों को लेकर एक डर बैठा है। अगर BJP बहुत जोर-शोर से वहां भारी उद्योगों की बात करती है तो तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी को भी लेफ्ट की तरह किसानों की जमीन छीनने वाली पार्टी के तौर पर प्रचारित कर सकता है। 

  • टाटा का सिंगूर से जाना बंगाल के औद्योगिक इतिहास के सबसे बड़े नुकसानों में से एक है। अब कोई भी पार्टी बहुत मुखर होकर औद्योगीकरण की बाद पश्चिम बंगाल में नहीं करती है। भले ही सिंगूर के किसानों का एक बड़ा धड़ा चाहता है था कि प्लांट लगे लेकिन अब तक सिंगूर, औद्योगीकरण से बहुत दूर छूट गया। 

  • पश्चिम बंगाल से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अक्सर BJP पर 'कॉर्पोरेट समर्थक' होने का आरोप लगाता है। पश्चिम बंगाल में वामदलों की विचारधारा हावी रही है। भले ही वापमदलों की छवि खुद ही बड़े उद्योगपतियों के लिए किसानों की बलि देने वाले राजनीतिक दल की बन गई लेकिन बीजेपी इस पर खुद आगे नहीं बढ़ना चाह रही है।

सिंगूर और नंद्रीग्राम आंदोलन, जिन्होंने ममता को नेता बना दिया

पश्चिम बंगाल, 34 साल तक वामपंथी सरकारों का गढ़ रहा है। दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में, लेफ्ट की सरकारें 3 दशक से ज्यादा वक्त तक सत्ता में नहीं रहीं। वामपंथी सरकार के पतन की कहानी, नंदीग्राम और सिंगूर से लिखी गई। ममता बनर्जी के सत्ता में आने की कहानी, नंदीग्राम से शुरू हुई है। उनके सत्ता में आने की वजह भी उद्योग है। उद्योगों की स्थापना नहीं, उद्योगों के विरोध को उन्होंने अपना सियासी हथियार बनाया, जिसकी वजह से वह आज तक सत्ता में टिकी हुई हैं। साल 2011 तक, सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों ने ममता बनर्जी 'मां, माटी मानुष' की सबसे बड़ी संरक्षिका बना दिया था। उन्हें इन आंदोलनों का चुनावी लाभ भी तगड़ा मिला। 

यह भी पढ़ें: ED, धरना, प्रेस कॉन्फ्रेंस, पश्चिम बंगाल में क्या 'खेला' कर रहीं ममता बनर्जी?

सिंगूर आंदोलन क्या था?

साल 2006 की बात है। टाटा मोटर्स ने ऐलान किया कि वे आम आदमी की बजट की कार, टाटा नैनो लेकर आ रहे हैं। इस कार की कीमतें बेहद कम रखी गईं। 1 लाख में कार देने का वादा किया गया। टाटा को भरोसा था कि लोग महंगी कारें नहीं खरीद पाते हैं, यह कार, ऑटोमोबाइल की दुनिया में सबसे किफायती और सस्ती कार साबित होगी। कोलकाता के पास सिंगूर एक छोटा सा इलाका है। यहां की जमीनें बहुत उपजाऊ हैं। हजारों किसानों की आजीविका इन्हीं जमीनों पर निर्भर हैं।

2006 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य थे। लेफ्ट फ्रंट की सरकार और टाट मोटर्स इस पर सहमत हुए कि सिंगूर को टाटा नैनो की मैन्युफैक्चरिंग साइट के तौर पर चुना जाएगा। भारत में औद्योगीकरण का दौर चल रहा था, लेफ्ट की सरकार, अपनी पारंपरिक रुढ़िवादी शैली के दायरे से बाहर निकलना चाह रही थी। राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए औद्योगीकरण सुधारने पर जोर दिया जा रहा था। उम्मीद थी कि पश्चिम बंगाल, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हब बन जाएगा, राज्य के लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा, राज्य से पूंजी का पलायन भी थम जाएगा। ऐसा हुआ नहीं। औद्योगीकरण का तेजी से विरोध होने लगा। 

सिंगूर में आमरण अनशन पर बैठीं ममता बनर्जी। Photo Credit: Social Media

यह भी पढ़ें: 'पश्चिम बंगाल में BJP का घुसपैठिया नैरेटिव झूठा,' कांग्रेस-CPI को ऐसा क्यों लगा?

 

सिंगूर में प्लांट लगाने का फैसला, किसानों के एक बड़े तबको को रास नहीं आया। किसानों ने अपनी जमीनें देने से इनकार कर दिया। वामपंथी सरकार, आम जनता में विद्रोह की नौबत आई। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1 हजार एकड़ तक जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा था। सिंगूर इस फैसले पर सुलग उठा। ममता बनर्जी का सियासी कद तब तक राज्य में बढ़ गया था। वह विपक्ष की नेता थीं और जमीन पर आंदोलन की अगुवाई कर रही थीं। साल 2006 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी हार गईं थीं और अब वह खुद को चमकाने की कोशिश में जुटी थीं। 

ममता बनर्जी किसानों के साथ जमीन पर उतरीं। उन्होंने उस 400 एकड़ जमीन को वापस करने की कवायद शुरू की, जिसका अधिग्रहण सरकार कर चुकी थी। किसानों का कहना था कि यह जमीन उन्होंने बेची नहीं है, छीन ली गई है। उन्होंने तर्क दिया कि जमीनों का जबरन अधिग्रहण हुआ है, इसलिए जमीन वापस लौटाई जाए।

जून 2008 में पूर्वी मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना और सिंगूर में पंचायत चुनाव हुए। ममता बनर्जी की तृणमलू कांग्रेस ने अप्रत्याशित जीत हासिल की। उनका जन समर्थन बढ़ रहा था और ममता बनर्जी सरकार की मुश्किलें बढ़ रहीं थीं। अगस्त तक उन्होंने फैक्ट्री के गेट के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान किया। हजारों किसान आंदोलन में कूद पड़े। राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी लेफ्ट की सरकार और ममता बनर्जी के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई लेकिन गतिरोध सुलझाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी हासिलनहीं हुई। इतना व्यापक विरोध हुआ कि टाटा को सिंगूर से अपने कदम वापस खींचने पड़े। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। Photo Credit: PTI

ममता ने सिंगूर आंदोलन के बाद किया क्या था?

साल 2011 में विधानसभा चुनाव हुए और वामदलों की 34 साल की सत्ता खत्म हो गई। ममता बनर्जी गरीब और मजदूरों की नई नेता बन गईं थी। सत्ता में आने के तत्काल बाद उन्होंने फरमान सुनाया कि नैनो प्लांट के लिए आंवटित जमीन लौटाई जाएगी। पुलिस और प्रशासन की मदद से यह जमीन रातों-रात कब्जाई गई। टाटा मोटर्स की अदालती चुनौती भी बेकार गई। साल 2016 में जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने का आदेश जारी हुआ। छोड़ी गई फैक्ट्री तबाह हो गई। ममता बनर्जी पर आरोप लगते रहे हैं कि राज्य के हित की जगह ममता बनर्जी ने अपना सियासी हित देखा था। पश्चिम बंगाल में 2 दशक बाद भी निवेशक बड़ा दांव खेलने से कतराते रहे हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के पास अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए गुजरात जैसे अवसर हैं। 


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap